(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा विधि Paper-2 - 2010

UPSC CIVIL SEVA AYOG

संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा (Download) UPSC IAS Mains Exam 2010 विधि (Paper-2)

खण्ड ‘A’

1. निम्नलिखित में से किन्हीं तीन के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 200 शब्दों से बाहर नहीं जाना चाहिए। अपने उत्तर को विधिक उपबंधों और विनिश्चित केसों की सहायता से परिपुष्ट कीजिए : 

(क) सामान्य आशयों का दुष्प्रेरण और आपराधिक षड्यंत्र से विभेदन कीजिए।

(ख) “प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार केवल अपराधों के विरुद्ध ही उपलब्ध है।'' चर्चा कीजिए।

(ग) “ 'वौलेंटी-नॉन-फिट इंजूरिया' का प्रतिवाद उस समय उपलब्ध नहीं होता है, जब छुड़ाने वाला छुड़ाने की क्रिया में आहत हो जाए।'' चर्चा कीजिए।

(घ) स्वयं प्रमाण (रैस इपसा लोक्विटुर) के सिद्धांत पर चर्चा कीजिए। हाल के निर्णयों (केसों) का हवाला दीजिए।

2. (क) "लोक न्यूसेंस गठित करने के लिए किसी कार्य का या किसी अवैध लोप का होना आवश्यक है, और यह आवश्यक नहीं है कि कार्य अवैध ही होना चाहिए।'' लोक न्यूसेंस के अपराध को, विनिश्चयित केसों की सहायता से, स्पष्ट कीजिए।

(ख) 'क' और 'ख' दोनों चौकीदारों को एक वरिष्ठ सेना अधिकारी श्री 'य' के घर के बाहर तैनात किया गया था। वे अकसर एक दूसरे को गरमागरम तू-तू मैं-मैं करते रहते थे। होली त्योहार के मौके पर उनके बीच कहा-सुनी हुई जिसका कारण था कि दोनों ही त्योहार के लिए जल्दी घर जाना चाहते थे। इसके फलस्वरूप उनके बीच हाथापाई हो गई। उन दोनों ने तुरन्त ही अपनी-अपनी रिवाल्वरें एक दूसरे पर तान दीं। 'ग' जो उनके साथ ही ड्यूटी पर था, ने बीच-बचाव किया और उन दोनों को शांत किया। दोनों ने अपने-अपने हथियार नीचे कर लिए। जैसे ही 'ख' ने देखा कि 'क' ने अपनी रिवाल्वर नीचे कर दी है, उसने तुरन्त 'क' पर गोली चला दी और उसको जान से मार दिया। मुकदमा चलने पर 'ख' को मृत्यु का दंडादेश दिया गया। परन्तु, अपील करने पर, उच्च न्यायालय ने आत्म-प्रतिरक्षा के अभिवाक् पर 'ख' को दोषमुक्त कर दिया । राज्य का इरादा उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध, उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए जाने का है। इस विषय पर निर्णयज विधि के प्रकाश में सलाह दीजिए। 

(ग) आपराधिक अभित्रास से संबंधित विधि पर चर्चा कीजिए। निर्णयज विधि का हवाला दीजिए। उद्दापन किस प्रकार से आपराधिक अभित्रास से भिन्न होता है ?

3. (क) मृत्यु दंड देते समय, 'दुर्लभ का भी दुर्लभतम थियोरी' को समझने के लिए उच्चतम न्यायालय ने क्या परीक्षण निर्धारित किया है ? क्या यह तर्क दिया जा सकता है कि मृत्यु दंड किसी भी स्थिति में समाज विरुद्ध होता है 

(ख) क्या आप अभियुक्त को दंड संहिता की धारा 304-बी और धारा 498-ए दोनों ही के अधीन दोषसिद्ध करना आवश्यक पाते हैं ? हाल के केसों का हवाला दीजिए।  

(ग) श्री 'क', एक पुराना हृदय रोगी, एक राजनीतिक वाद-विवाद. में पड़ गया और तर्क-वितर्क के दौरान उसके प्रतिद्वंद्वी ने उसको गुस्से में भर कर देखा और कहा कि “आप जैसे लोगों को तो तब तक मार पड़नी चाहिए जब तक मर न जाएं।'' इसको सुनते ही 'क' को हृदय घात का दौरा पड़ा और वह उसी स्थल पर मर गया। उसके प्रतिद्वंद्वी के दायित्व पर चर्चा कीजिए। राज्य की ओर से भी तर्क दीजिए।

(घ) एक अवयस्क लड़की 'क' बुरे बर्ताव के कारण अपने माता-पिता के घर को छोड़ कर अपने मित्र 'ख' के साथ रहती है। क्या व्यपहरण के लिए उसका (ख का) अभियोजन किया जा सकता है ? 

4. (क) एक साप्ताहिक के संपादक ने एक वादी के कारोबार को निशाना बना कर लेखों की एक श्रृंखला प्रकाशित की, जिसमें अभिकथन किया गया था कि कर-वंचन, आयात-निर्यात कूट योजनाओं, विदेशी मुद्रा अतिक्रमणों सहित विधिविरुद्ध एवं कपटपूर्ण साधनों को अपनाकर किस प्रकार से कारोबार के विशाल साम्राज्य के धन का निर्माण किया गया था और कि संगठन की संक्रियाओं में जांच-पड़ताल को किस प्रकार दबा दिया गया था। मानहानि के लिए कार्रवाई में, प्रतिवादी ने लोक हित के मामले में उचित टीका-टिप्पणी' का प्रतिवाद पेश किया। वादी ने यह दिखाने के लिए साक्ष्य सामने रखा कि पूर्व के एक मानहानि के केस में प्रतिवादी को वादी के आगे माफ़ी मांगनी पड़ी थी और कि वर्तमान प्रकाशन दुर्भाव से प्रेरित था। केस के तथ्यों के प्रकाश में, उचित टीका-टिप्पणी' के प्रतिवाद पर चर्चा कीजिए।

(ख) हमें अपनी संपत्ति का इस्तेमाल ऐसे करना आवश्यक होता है कि उसके कारण किसी अन्य को अपनी संपत्ति का इस्तेमाल करने में असुविधा न हो। परंतु फिर भी अल्पकालिक असुविधा वादयोग्य नहीं होती। इस संबंध में विधि को स्पष्ट कीजिए।

(ग) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अधीन अस्पतालों के दायित्व पर चर्चा कीजिए। विनिश्चित केसों का हवाला भी दीजिए। 

खण्ड 'B' 

5. (क) संविदा-भंग पर केवल वही हानि वसूल की जा सकती है, जो कि संविदा करने के समय दोनों पक्षकारों के ध्यान में थी। चर्चा कीजिए। 

(ख) प्रतिभू लेने का असली उद्देश्य ही विफल हो जाता है, यदि लेनदार के लिए प्रतिभू के विरुद्ध उपचारों को मुल्तवी करना आवश्यक हो। प्रतिभू की देयता को स्पष्ट कीजिए। 

(ग) आप वचन-पत्र (प्रॉमिसरी नोट) से क्या समझते हैं ? चर्चा कीजिए। 

(घ) व्यापार की केवल समाप्ति का परिणाम भागीदारी का विघटन नहीं होता है। भागीदारों के बीच अधिकारों और देयताओं का हिसाब-किताब करना आवश्यक होता है। समझाइए।

6. (क) प्रतियोगिता अधिनियम को छोटे प्रतियोगियों और उपभोगी जनता के विरुद्ध एकाधिकारों एवं नावाजिब व्यापारिक व्यवहारों की रोकथाम के लिए बनाया गया है। इस बात को विस्तारपूर्वक सुस्पष्ट कीजिए। 

(ख) लोक हित मुकदमेबाज़ी पर्यावरण का संरक्षण करने में एक महत्वपूर्ण साधन रही है। केसों की सहायता से इस पर चर्चा कीजिए। 

7. (क) पक्षकारों के विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने में निष्पक्ष और स्वतंत्र सुलहकार उनकी सहायता करता है। सुलह से संबंधित विधि के उपबंधों पर चर्चा कीजिए। 

(ख) 'विदेशी पंचाट' और 'पारंपरिक पंचाट' के बीच विभेदन कीजिए। केस विधि की सहायता से "विदेशी पंचाट' के प्रवर्तन के लिए कार्यविधि पर चर्चा कीजिए।

8. (क) 'अंकीय हस्ताक्षर' की विधिक मान्यता का परीक्षण कीजिए और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अधीन उसके रजिस्ट्रेशन के लिए कार्यविधि को स्पष्ट कीजिए।

(ख) कार्रवाई में चला देना' के सिद्धांत को 'मिथ्या पण्य विवरण' के उपयोग तक विस्तृत किया गया है। सफल चला देना कार्रवाई के लिए शर्तों को और विरोधी पक्षकार को उपलब्ध प्रतिरक्षाओं को स्पष्ट कीजिए।

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