(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा विधि Paper-1 - 2016

UPSC CIVIL SEVA AYOG

संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा (Download) UPSC IAS Mains Exam 2016 विधि (Paper-1)

खण्ड ‘A’

1. (a) भारत के संविधान में समाविष्ट 'परिसंघवाद' की अवधारणा की व्याख्या कीजिए। 

(b) “संविधान को संशोधित करने हेतु अंगीकृत की गयी प्रक्रिया अद्वितीय है; यह अनम्य नहीं है फिर भी कठिन है।" स्पष्ट कीजिए। 

(c) पक्षपात के विरुद्ध नियम उन घटकों पर प्रहार है जो निर्णय तक पहुँचने में अनुपयुक्त प्रभाव डाल सकते हैं। टिप्पणी कीजिए। 

(d) 'सर्वोपरि अधिकार' शब्द से आप क्या समझते हैं? वर्तमान के संदर्भ में इसकी सुसंगतता की विवेचना कीजिए। 

(e) संवैधानिक संशोधनों एवं निर्णीत वादों के संदर्भ में 'मौलिक अधिकारों' एवं राज्य के नीति-निदेशक तत्त्वों के बीच सम्बन्धों की विवेचना कीजिए। 

2. (a) विषय एवं भूक्षेत्र के आधार पर संविधान में प्रदत्त केन्द्र एवं राज्यों की विधायी शक्तियों की विवेचना कीजिए। 

(b) संसद् की विधि निर्मित करने की 'अवशिष्ट शक्तियों' की विवेचना कीजिए। 

(c) “प्रशासनिक नियम निर्माण करने की आवश्यकता प्रत्यायुक्त विधि-निर्माण का अपरिहार्य है।" टिप्पणी कीजिए। 

3. (a) राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए, विशेषकर तब जबकि दो या दो से अधिक राज्य अन्तर्राज्यीय करार का अनुपालन न कर रहे हों। 

(b) 99वें संशोधन अधिनियम, 2014 में अन्तर्निहित सिद्धान्त की विवेचना करते हुए देश के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति की वर्तमान व्यवस्था पर टिप्पणी कीजिए।

(c) संघ लोक सेवा आयोग की शक्तियों एवं कार्यों की विवेचना कीजिए। यह भी सुस्पष्ट कीजिए कि किस प्रकार इसने अपनी निष्पक्षता को बनाये रखा है। 

4. (a) “'विधि का नियम (रूल ऑफ लॉ) कानूनियत के सिद्धान्त पर आधारित है तथा मनमानी करने की शक्ति का प्रयोग करने के विपरीत है।" विवेचना कीजिए। यह सुस्पष्ट कीजिए कि क्या कारण बताये बिना शक्ति का प्रयोग मनमाना शक्ति का प्रयोग करने के तुल्य है।

(b) व्यापारिक निकायों की प्रचुरोद्भवता के परिणामस्वरूप प्रशासनिक त्रुटियों से व्यक्ति के अधिकारों में परेशानियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। इन प्रशासनिक त्रुटियों को ठीक करने में 'ओम्बुड्समैन' की भूमिका की विवेचना कीजिए। 

(c) “ 'पॉलिसी तथा गाइडलाइन थियोरी' की यह पूर्वधारणा है कि अर्द्ध-न्यायिक प्राधिकार ने न्याय प्रदान कर दिया है।" विस्तार से विवेचना कीजिए।

SECTION "B" 

5. (a) अन्तर्राष्ट्रीय विधि की प्रकृति एवं इसके आधार की विवेचना कीजिए। 

(b) मानव अधिकार संधियों के विशेष संदर्भ में अन्तर्राष्ट्रीय विधि में व्यक्ति की स्थिति की विवेचना कीजिए। 

(c) वह संधि निरस्त समझी जाती है जो अपने को सम्मिलित किए जाते समय किसी वर्तमान या नई या उभरती हुई अत्यावश्यक अन्तर्राष्ट्रीय विधि मानक या 'जस कोजेन्स' के विरोधाभास में है। टिप्पणी कीजिए। 

(d) क्या ऐसी प्रथा की परम्परा, जिसमें एक विशिष्ट उत्सर्ग द्वारा सभी प्रकार के आरक्षणों का निषेध अथवा कुछ या विशेष या विशिष्ट प्रकार के आरक्षणों का निषेध अथवा आरक्षणों का पूर्णतया निषेध है, अन्तर्राष्ट्रीय विधि के विकास में बाधक है? विवेचना कीजिए।

(e) अन्तर्राष्ट्रीय विधि, मान्यता के साक्ष्यिक सिद्धान्त का साक्ष्य है। विवेचना कीजिए। 

6. (a) किस प्रकार भारत में अन्तर्राष्ट्रीय विधि, राष्ट्रीय विधि का अंग बन गया है, विवेचना कीजिए। अन्तर्राष्ट्रीय विधि एवं राष्ट्रीय विधि के मध्य विरोधाभास की स्थिति में इस देश के न्यायालयों द्वारा किस विधि का प्रयोग किया जाएगा, स्पष्ट कीजिए।

(b) क्या भारत, भारत-यू० के० के पारस्परिक विधिक सहायता करार के तहत एक भारतीय नागरिक, जो कि भारतीय न्यायालय के उसके विरुद्ध कपट तथा मनी लान्डरिंग मामलों में पारित आदेश के बावजूद यू० के० के लिए पलायन कर गया है, के प्रत्यर्पण की माँग कर सकता है? व्याख्या कीजिए।

(c) अन्तर्राष्ट्रीय मानवता-सम्बन्धी विधि एवं अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार विधि के बीच आवश्यक भिन्नताएँ क्या हैं? व्याख्या कीजिए। 

7. (a) किसी देश के टेरिटोरियल वाटर (जिसमें अन्तर्राष्ट्रीय जलडमरूमध्य शामिल हैं) से होकर 'निर्दोष संचरण के अधिकार' की विधिक स्थिति की विवेचना कीजिए।

(b) किसी देश की महाद्वीपीय मनतट भूमि, जिसमें दो या दो से अधिक देशों की सम्मिलित मग्नतट भूमि भी शामिल है, के परिसीमन से सम्बन्धित विधि की विवेचना कीजिए।

(c) यू० एन० कन्वेन्शन ऑन द लॉ ऑफ द सी, 1982.के अध्याधीन स्थापित इन्टरनैशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (आइ० टी० एल० ओ० एस०) के कार्यों, शक्तियों एवं क्षेत्राधिकार का वर्णन कीजिए। 

8. (a) वादों की सहायता से रूढ़िगत विधि के अन्तर्राष्ट्रीय नियम के घटकों की विवेचना कीजिए। 

(b) अन्तर्राष्ट्रीय विवादों के शान्तिपूर्ण निवारण हेतु संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अध्याय VI में विशिष्ट रूप से उल्लिखित विभिन्न उपायों का वर्णन सुसंगत केस विधि की सहायता से कीजिए। इस संदर्भ में सुरक्षा परिषद् की भूमिका की भी विवेचना कीजिए। 

(c) यू० एन० एफ० सी० सी० सी०, 2015 के अन्तर्गत पेरिस करार में उल्लिखित अन्तिम शब्दों को 195 राष्ट्रों ने एकमत से अंगीकृत किया था। इस करार के अनुसार राष्ट्रीय अवधारित अंशदान (एन० डी० सी०) की सूचना प्रत्येक 5वें वर्ष दी जाएगी तथा यू० एन० एफ० सी० सी० सी० सचिवालय के साथ इसे पंजीकृत किया जाएगा जो कि 'प्रगामी' होगा स्वयं प्रत्येक राष्ट्र द्वारा निर्धारित लक्ष्य पर। फलतः अंशदान 'बाध्यकारी नहीं है अन्तर्राष्ट्रीय विधि के अन्तर्गत और एक 'नाम एवं अपमान व्यवस्था' या 'नाम एवं प्रोत्साहन योजना' होगी। इसके आवश्यक गुणों को स्पष्ट करते हुए, इस करार की उपादेयता पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।

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