(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - दर्शनशास्त्र(प्रश्न-पत्र-1)

 

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(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा
दर्शनशास्त्र (प्रश्न-पत्र-1)


खण्ड़ ‘A’

1. निम्नलिखित में से प्रत्येक का लगभग 150 शब्दों में उत्तर दीजिए : 10x5=50 marks

1.(a) हेगेल के इस कथन की व्याख्या कीजिए : “समस्त अभेद, अभेदाभेद है।" 10 marks
1.(b) संवृत्तिशास्त्रीय अपचयवाद के समर्थन में हुसर्ल की तर्कबुद्धि की व्याख्या कीजिए। 10 marks
1.(c) ‘मैं एक मनुष्य से मिला' यह कथन कैसे रसेल के लिये शब्दार्थक दृष्टि से समस्यापरक है ? रसेल इस कथन की सार्थकता का विवरण कैसे देते हैं ? 10 marks
1.(d) किस अर्थ में प्रत्यय अंतर्यामी और इंद्रियातीत दोनों ही हो सकते हैं ? इस सन्दर्भ में प्लेटो के सामान्य और विशेषों के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए। 10 marks
1.(e) कैसे ह्यूम के अनुभव का विश्लेषण किसी स्थायी सत, चाहे वह भौतिक हो या मानसिक, में विश्वास के लिए कोई आधार नहीं छोड़ता है। 10 marks

2.(a) कैसे ‘सभी देह विस्तारित हैं' - एक विश्लेषणात्मक निर्णय है, किन्तु ‘सभी देह भारी हैं एक संश्लेषणात्मक निर्णय है ? क्या ‘प्रत्येक घटना का एक कारण है - एक विश्लेषणात्मक अथवा एक संश्लेषणात्मक निर्णय ? व्याख्या कीजिये । 20 marks
2.(b) विटगेन्स्टाइन का अर्थ का चित्र सिद्धान्त क्या है ? उसके द्वारा इस सिद्धान्त को छोड़ने तथा अर्थ के उपयोग सिद्धान्त को प्रस्तावित करने के क्या कारण हैं ? 15 marks
2.(c) अरस्तू के आकार और भौतिक द्रव्य के सिद्धान्त की व्याख्या कीजिये । यह अरस्तू को कैसे परिवर्तन (गति) एवं स्थायित्व की समस्या के समाधान के लिये समर्थ बनाता है ? 15 marks

3.(a) कांट के दिक् एवं काल के सिद्धान्त की व्याख्या कीजिये । यह सिद्धान्त काण्ट को यह व्याख्या करने में कैसे समर्थ बनाता है कि गणितीय प्रतिज्ञप्तियाँ संश्लेषणात्मक और अनुभवनिरपेक्ष दोनों हो सकती हैं ? 20 marks
3.(b) देकार्त के अनुसार एक ‘स्पष्ट और सुभिन्न प्रत्यय' क्या है ? स्पष्ट और सुभिन्न प्रत्ययों की ज्ञानमीमांसीय स्थिति क्या है ? क्या यह विवरण भौतिक पदार्थों के अस्तित्व को सिद्ध करने में देकार्त का सहायक है ? व्याख्या कीजिए । 15 marks
3.(c) इंद्रियानुभववाद के दो हठधर्म क्या हैं, जिन पर क्वाइन प्रहार करता है ? द्वितीय हठधर्म के विरुद्ध उसके तर्क क्या है ? 15 marks

4.(a) लॉक किस प्रकार मूल गुणों और गौण गुणों के बीच भेद करता है ? क्या वह मूल गुणों के प्रत्यय और मूलगुणों के साथ साथ गौण गुणों के प्रत्यय और गौण गुणों के बीच भी भेद करता है ? विवेचना कीजिए। 20 marks
4.(b) ‘जो भी रंगीन है वह विस्तृत है, क्या यह वाक्य तार्किक प्रत्यक्षवादियों की अर्थपूर्णता की कसौटी को सन्तुष्ट करता है ? व्याख्या कीजिए। 15 marks
4.(c) हाइडेगर की प्रामाणिकता की अवधारणा का विवेचन कीजिये और व्याख्या कीजिये कि कैसे एक अप्रामाणिक डेज़ाइन खोयी आत्मा को पुन: प्राप्त करता है ? 15 marks

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खण्ड 'B'

5. निम्नलिखित में प्रत्येक का लगभग 150 शब्दों में संक्षिप्त उत्तर दीजिए :

5.(a) “चैतन्य से विशिष्ट देह के अतिरिक्त आत्मा कुछ नहीं है। इस मत को स्वीकार करने में चार्वाक के क्या तर्क है ? 10 marks
5.(b) वैशेषिक दर्शन के अनुसार पदार्थ के आवश्यक लक्षण क्या हैं ? 10 marks
5.(c) न्याय दर्शन में प्रतिपादित वैध हेतु (वेलिड हेतु) की उपाधियों की व्याख्या कीजिए । 10 marks
5.(d) योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः” से क्या तात्पर्य है ? चित्तवृत्ति तथा उसके प्रभावों की योग दर्शन के व्याख्या कीजिये । 10 marks
5.(e) माध्यमिकों के अनुसार सत् के स्वरूप की व्याख्या करने में चतुष्कोटि की भूमिका की व्याख्या कीजिये । 10 marks

6.(a) प्रत्यक्ष की प्राचीन न्याय परिभाषा की व्याख्या कीजिये । इस परिभाषा को परवर्ती न्यायायिकों द्वारा क्यों अपर्याप्त माना गया है ? 20 marks
6.(b) जैन तत्त्वमीमांसा सापेक्षवादी एवं वस्तुवादी बहुतत्त्ववाद है ।" विवेचना कीजिये । 15 marks
6.(c) क्षणिकवाद को सुस्थापित करने के लिये बौद्धों के तर्क क्या हैं ? क्या ये तर्क अनिवार्यतः कृतप्रणाश (कृतनाश) और अकृताभ्युपगम की ओर ले जाते हैं ? 15 marks

7.(a) माध्यमिक, योगाचारवादी एवं सर्वास्तिवादी सत् के स्वरूप के सम्बन्ध में कैसे भिन्न मत रखते हैं सर्वास्तिवादी कैसे अपने में सत् की सुविज्ञता के विषय में भिन्न मत रखते हैं ? 20 marks
7.(b) अतिमानसिक चेतना की अनुभूति में श्री अरविन्द का समग्रयोग कैसे सहायक है ? विवेचना कीजिये। 15 marks
7.(c) विवर्तवाद एवं परिणामवाद के बीच कार्यकारण-भाव के संदर्भ में भेद स्पष्ट करें तथा इन सिद्धान्तों के आलोक में शंकर एवं रामानुज, जगत् की स्थिति (status) के सम्बन्ध में कैसे भिन्न मत रखते हैं, व्याख्या कीजिये । 15 marks

8.(a) 15 मीमांसकों के अनुसार ज्ञान के प्रामाण्य सिद्धान्त (प्रामाण्यवाद) की व्याख्या कीजिये । न्याय के प्रामाण्य सिद्धान्त की आलोचना मीमांसक कैसे करते हैं ? 20 marks
8.(b) ईश्वर के प्रति रामानुज के संप्रत्यय की व्याख्या कीजिये और उन कठिनाइयों की जाँच कीजिये जो भौतिक द्रव्य एवं चित् की ईश्वर के साथ सम्बन्ध की व्याख्या करते समय उनके सामने आयी । 15 marks
8.(c) अपने कार्यकारण-भाव के सिद्धान्त के आलोक में क्या सांख्य दर्शन के लिए जगत् में चेतना की उपस्थिति की व्याख्या करना सम्भव है ? विवेचना कीजिये । 15 marks

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