(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा विधि Paper-1 - 2018

UPSC CIVIL SEVA AYOG

संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा (Download) UPSC IAS Mains Exam 2018 विधि (Paper-1)

खण्ड ‘A’

Q1. निम्नलिखित प्रश्नों में से प्रत्येक का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए: 

(a) सहकारी परिसंघवाद एवं प्रतियोगी परिसंघवाद शब्दों से आप क्या समझते हैं? क्या आप इस मत से सहमत हैं कि भारत का संविधान प्रतियोगी परिसंघवाद की संकल्पना पर आधारित है, न कि 'सहकारी परिसंघवाद की संकल्पना पर?

(b) प्रशासनिक शक्तियाँ/कार्य हमेशा विधिसम्मत शासन के सिद्धान्त के विरोध में नहीं होते हैं । उदाहरण सहित विवेचना कीजिए।

(c) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के अधीन राज्य की संकल्पना के परिवर्तनशील आयामों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। 

(d) नैसर्गिक न्याय एक ऐसा तैयार फार्मूला नहीं है, जिसे सभी परिस्थितियों में कठोर एकरूपता के साथ माना जाए ।" टिप्पणी कीजिए । निर्णयजन्य विधि का उल्लेख कीजिए ।

(e) “सरकार के संसदीय स्वरूप के अंगीकरण के साथ अनुच्छेद 53(1) के अधीन निहितकारी खण्ड काफी हद तक निरर्थक हो जाता है, क्योंकि वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मंत्रालय में निहित होती है।" भारतीय संविधान में राष्ट्रपति की प्रतिष्ठा एवं स्थिति के संदर्भ में, उपर्युक्त कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए । यह भी बताइए कि यदि भारत का राष्ट्रपति प्रधान मंत्री की सलाह को नहीं मानता है, तो उसके क्या-क्या परिणाम होंगे ।

Q2. (a) संविधान में, विशेष रूप से संविधान के अध्याय IV में और संविधान के अनुच्छेद 14 के अधीन, परिकल्पित सामाजिक न्याय की संकल्पना का परीक्षण कीजिए।

(b) सिविल कर्मचारी को पदच्युति, निष्कासन अथवा सेवाओं की श्रेणी में अवनति के विरुद्ध क्या-क्या संबैधानिक रक्षोपाय उपलब्ध हैं ? क्या ये अधिकार सार्वजनिक निगम के किसी कर्मचारी को भी उपलब्ध हैं ? कानूनी प्रावधानों तथा निर्णयजन्य विधि का संदर्भ देकर विवेचना कीजिए।

(c) भारत में उच्च न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति का सर्वोत्तम पद्धति या तरीका क्या होगा ? अपने विचार व्यक्त कीजिए और उनके समर्थन में तर्क दीजिए ।

Q3. (a) भारत में स्थानीय निकायों के प्रचालन में क्या-क्या प्रमुख चुनौतियाँ हैं ? क्या यह सफलता की कहानी है या कि कुछ और है?

(b) क्या राज्यपाल का पद राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पर आधारित है ? विवेचना कीजिए । असंख्य शक्तियों के इस्तेमाल में, राज्यपाल का 'विवेक' किस चीज़ से गठित होता है ? कानूनी प्रावधानों एवं संगत निर्णयजन्य विधि का संदर्भ देकर व्याख्या कीजिए।

(c) प्रत्यायोजित विधान की सांविधानिकता की विवेचना कीजिए । प्रत्यायोजित विधान की परिसीमाएँ क्या है ? व्याख्या कीजिए । 

Q4. (a) "वाक् स्वातंत्र्य में अन्तर्निहित प्रेस की स्वतंत्रता नागरिक के वाक् स्वातंत्र्य एवं अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य से उच्चतर धरातल पर स्थित नहीं है, और न ही प्रेस को सामान्य नागरिक से भिन्न कोई ऐसा विशेषाधिकार प्राप्त है ।" इस कथन की व्याख्या कीजिए तथा 'वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' और 'वाक् एवं अभिव्यक्ति शब्दों के बीच विभेदन भी कीजिए। 

(b) "अनुच्छेद 356 के अधीन किसी राज्य में आपातकाल का अधिरोपण हमेशा से विवाद का विषय रहा है।" इस पृष्ठपट में, किसी राज्य में आपातकाल की उद्घोषणा के परिणामों की व्याख्या कीजिए।

(c) किन परिस्थितियों में, भारत के उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में, संबंधित पक्षकारों के अलावा अन्य व्यक्ति, सुने जाने के अधिकार के लिए रिट याचिकाएं दायर कर सकता है ? ऐसी याचिकाओं की परिसीमाओं का भी उल्लेख कीजिए । 

खण्ड 'B'

Q5. निम्नलिखित प्रश्नों में से प्रत्येक का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए : 

(a) अंतर्राष्ट्रीय विधि की परम्परागत एवं आधुनिक परिभाषाओं के बीच भिन्नताओं की व्याख्या कीजिए । वर्तमान संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय विधि के बढ़ते हुए विषय-क्षेत्र एवं महत्त्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए ।

(b) “जहाँ प्रत्यर्पण प्रारंभ होता है वहाँ शरण समाप्त हो जाती है ।" उपर्युक्त कथन का प्रत्यर्पणीय व्यक्तियों और प्रत्यर्पण अपराधों के विशेष संदर्भ में, समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए । 

(c) सामान्यत: यह समझा जाता है कि “अधिकार एवं कर्तव्य सहसंबंधी होते हैं । फिर भी, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आंदोलन का विकास कर्तव्योन्मुख होने की अपेक्षा अधिकारोन्मुख अधिक हुआ है । ऐसा क्यों हुआ है ? विविध अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार लिखतों की सहायता से व्याख्या कीजिए । क्या आप मानवाधिकार आंदोलन के बजाय 'मानव कर्तव्य आंदोलन के विषय में सोच सकते हैं ?

(d) अंतर्राष्ट्रीय संधि की परिभाषा दीजिए और आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय विधि में संधियों के बढ़ते हुए महत्त्व की व्याख्या कीजिए । क्या बहुपक्षीय संधि का परिसमापन किया जा सकता है ? यदि हाँ, तो किन आधारों पर ? व्याख्या कीजिए । 

(e) क्या आप इस कथन से सहमत हैं कि “वैश्वीकरण एक आवश्यक बुराई है ? आई.एम.एफ, और आई.बी.आर.डी. द्वारा विकासशील देशों, विशेषकर भारत के संदर्भ में, संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रमों एवं नीतियों के माध्यम से चलाई गई सुधार प्रक्रिया की विवक्षाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। 

Q6. (a) “महाद्वीपीय शेल्फ को तटवर्ती राज्य के भू-खण्ड का प्राकृतिक विस्तारीकरण माना जाता था ।" अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आई.सी.जे.) की संगत निर्णयजन्य विधि की सहायता से, महाद्वीपीय शेल्फ के सीमांकन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए ।

(b) अंतर्राष्ट्रीय विवाद की परिभाषा दीजिए । विवादों के शांतिपूर्ण समाधान तथा बाध्यकारी समाधान के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए । अंतर्राष्ट्रीय विवाद समाधान में, ए.डी.आर. विधियों के बढ़ते हुए महत्त्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

(c) “प्रमुखतः निषेधाधिकार (वीटो पावर) के कारण सुरक्षा परिषद की सदस्यता लोकतांत्रिक नहीं है । इस दृष्टि से, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार किया जाना चाहिए तथा अन्य देशों को अधिक सदस्यता दी जानी चाहिए ताकि राष्ट्रों के समुदाय की जनसांख्यिकीय संरचना प्रतिबिंबित हो ।" व्याख्या कीजिए। 

Q7. (a) "चार जेनेवा कन्वेंशनों (1949) और 1977 के उनके अतिरिक्त प्रोटोकॉलों के कुछ प्रावधानों ने आज अंतर्राष्ट्रीय मानवीय विधि के रूढ़िक सिद्धान्तों (जस कोजन्स) का दर्जा प्राप्त कर लिया है। क्या आप उपर्युक्त कथन से सहमत हैं ? चार जेनेवा कन्वेंशनों के साझे अनुच्छेद 3 के आलोक में, अपने तर्कों का औचित्य बताइए ।

(b) अद्यतन प्रौद्योगिकीय विकासों के संदर्भ में, आतंकवाद की संकल्पना की व्याख्या कीजिए। आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए, प्रभावशाली रणनीति के रूप में, क्या आप प्रति-आतंकवाद (काउण्टर-टेररिज़्म) को तर्कसंगत मानते हैं ? उदीयमान नवीन आतंकवादी चुनौतियों का सामना करने के लिए क्या विद्यमान अंतर्राष्ट्रीय विधिक व्यवस्था प्रभावशाली है ? व्याख्या कीजिए।

(c) पेरिस तथा बर्न व्यवस्थाओं (रेजीमों) के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए । क्या आप इस कथन से सहमत हैं कि "व्यापार संबंधी बौद्धिक सम्पदा अधिकार (ट्रिप्स) और कुछ नहीं है, बल्कि केवल पेरिस तथा बर्न कन्वेंशनों की पुनरावृत्ति मात्र है ।" विवेचना कीजिए । 

Q8. (a) "अंतर्राष्ट्रीय विधि मुख्यत: राज्यों के अधिकारों, कर्तव्यों एवं हितों से संबद्ध है।" अंतर्राष्ट्रीय विधि में व्यक्तियों तथा गैर-राज्य निकायों के स्थान के उल्लेख के साथ इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। 

(b) क्या आप इस कथन से सहमत हैं कि 1972 की स्टॉकहोम उद्घोषणा से प्रारम्भ होकर पर्यावरण संबंधी अबाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय लिखतों पर निर्भरता बढ़ गई है? इस प्रवृत्ति का विकास क्यों हुआ है और क्या ये लिखतें संधियों की अपेक्षा ज़्यादा उपयोगी हुई हैं ? व्याख्या कीजिए।

(c) सामान्यतया यह विचार व्यक्त किया जाता है कि "20वीं शताब्दी में संयुक्त राष्ट्र ने शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए जो कुछ किया, 21वीं शताब्दी में आर्थिक एवं व्यापार संबंधों के लिए विश्व व्यापार संगठन वही भूमिका निभाने जा रहा है । राज्यों की राजनीतिक संप्रभुता से आर्थिक संप्रभुता की ओर परिवर्तनशील धारणा के संदर्भ में उपर्युक्त कथन पर चर्चा कीजिए। 

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