(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा भूविज्ञान Paper-2 - 2019

UPSC CIVIL SEVA AYOG

संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा (Download) UPSC IAS Mains Exam 2019 भूविज्ञान (Paper-2)

खण्ड ‘A’

1.(a) क्रिस्टल फलक के लिए मिलर अक्षांकों और हरमन मौगन् संकेतनों के क्या सिद्धांत हैं ? क्रिस्टल फलकों के मिलर अक्षांकों का परिकलन कीजिये जो अ-अक्ष को 2 इकाई की दूरी पर, ब-अक्ष को 3 इकाई की दूरी पर काटती है एवम् स-अक्ष के समान्तर है।

(b) 'परफाइरिटिक' और 'वीट्रोफाइरिक' गठन क्या हैं ? उपयुक्त रेखाचित्रों की मदद से वर्णन कीजिये । वीट्रोफाइरिक गठन के शैलोत्पत्ति महत्व पर टिप्पणी कीजिये । 

(c) 'आंशिक पिघलन' को परिभाषित कीजिये । मैग्मा के बनने में, आंशिक पिघलन की भूमिका का वर्णन कीजिये। 

(d) ऊष्मागतिक कला नियम को परिभाषित कीजिये और इसकी गणितीय व्यंजक का कथन कीजिये । एक तंत्र जो आठ घटकों एवं पांच खनिज कलाओं के साथ साम्यावस्था में है उसके लिए स्वतंत्रता की कोटि का निर्धारण कीजिये । 

(e) ऊर्मिका चिह्न क्या हैं ? ऊर्मिका चिह्नों के विभिन्न प्रकारों और उनके भूवैज्ञानिक महत्व का वर्णन कीजिए। 

2. (a) व्यतिकरण आकृति क्या है ? एक अक्षीय खनिजों के लिए व्यतिकरण आकृतियां बनने के लिये क्या परिस्थितियां आवश्यक हैं ? एक अक्षीय ऋणात्मक एवं धनात्मक क्रिस्टलों के लिये प्रकाशिक अक्ष खींचिये।

(b) पाइरौक्सीन समूह के खनिजों के वर्गीकरण, संघटन और संरचना पर चर्चा कीजिये । हाइपरस्थीन के प्रकाशकीय गुणधर्मों और उपस्थिति पर टिप्पणी कीजिये । 

(c) प्रक्षेपण आरेख का उपयोग करते हुऐ, द्विसमलंबाक्ष तंत्र के सामान्य वर्ग में विकसित विभिन्न क्रिस्टलीय आकृतियों का वर्णन कीजिये।

3. (a) कलीय नियमों का उपयोग करते हुए, डायोप्साइड-ऐनोर्थाइट तंत्र की द्विअंगी गलनक्रांतिक प्रकृति को समझाइये । डायोप्साइड-एनोर्थाइट बहलीय घटकों के बेसाल्टिक मेग्मा के क्रिस्टलीकरण के दौरान उत्पन्न गठन पर टिप्पणी कीजिये । 

(b) क्षारीय शैलों की अभिलाक्षणिक खनिजिकी और रसायन क्या हैं ? क्षारीय शैलों की विवर्तनिक मैग्मी सैटिंग और मैग्मा उत्पादन का वर्णन कीजिये । 

(c) कायांतरण में संलक्षणी' और 'ग्रेड' की संकल्पना क्या है ? प्रादेशिकतः और तापीयतः कायान्तरित शैल में महत्वपूर्ण संलक्षणी साहचर्यों पर चर्चा कीजिये।

4. (a)'भारी खनिज' की परिभाषा दीजिए । उनको पृथक करने के विभिन्न तरीकों का वर्णन कीजिए और उद्गम क्षेत्र निर्धारण करने में भारी खनिज संजाति की उपयोगिता पर टिप्पणी कीजिए।

(b) संगुटिकाश्म क्या होते हैं ? उनके वर्गीकरण और भूवैज्ञानिक महत्व का वर्णन कीजिए। 

(c) आर्कोज़ के संविन्यास, संघटन और भूवैज्ञानिक महत्व पर चर्चा कीजिए। 

खण्ड 'B'

5. (a) उष्णजलीय सल्फाइड निक्षेप से जुड़ी विभिन्न आकृतियों एवं संरचनाओं पर चर्चा कीजिये । सिंघभूम सल्फाइड निक्षेप में खनिज विरचन के अनुक्रम पर टिप्पणी कीजिये।

(b) सीमेंट उद्योग में चूनापत्थर और जिप्सम के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली गुणता कसौटियों पर चर्चा कीजिए। विंध्यन बेसिन में सीमेंट ग्रेड चूनापत्थर के वितरण पर टिप्पणी कीजिए।

(c) अयस्क पिंड के पिच और अवनमन का क्या अर्थ है ? दिए गए आंकड़ों से Pb-अयस्क पिंड के औसत ग्रेड का परिकलन कीजिए : 

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  • नमूना 1 20 से.मी. x 2.8% Pb                                               
  • नमूना 2 40 से.मी. x 2.5% Pb 
  • नमूना 3 12 से.मी. x 3.2% Pb
  • कट आफ ग्रेड है 2.4% पीबी न्यूनतम निखनन चौड़ाई 1.0 मी. 

(d) ब्रह्मांड-रसायन में उल्कापिंड के महत्व पर चर्चा कीजिए ।

(e) तटीय क्षेत्रों का भौमजल किस प्रकार समुद्री जल के अंतर्वेधन के द्वारा दूषित हो जाता है ? इस समस्या के अल्पीकरण पर टिप्पणी कीजिए।

6.(a) भारत के प्रीकेम्ब्रियन् लौह अयस्क निक्षेपों के वितरण, उपस्थिति की अवस्था, खनिजिकी और उत्पत्ति पर चर्चा कीजिए।

(b) उच्चतापसह पदार्थ क्या होता है ? दक्षिण भारत के उच्चतापसह खनिजों के भूविज्ञान, उपस्थिति की अवस्था एवम् उत्पत्ति पर चर्चा कीजिये । 

(c) भारत में पेट्रोलियमधारी द्रोणियों का वितरण दीजिये । असम द्रोणी के तेल क्षेत्रों के भूविज्ञान पर चर्चा कीजिए।

7.(a) विभिन्न प्रकारों की खनन विधियों को सूचीबद्ध कीजिए । कोयला खनन विधियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा कीजिए। 

(b) भारत के रॉक फ़ॉसफेट/फॉसफोराइट निक्षेपों की खनिजिकी और उत्पत्ति का विवरण लिखिए । उर्वरक उद्योग में इस्तेमाल किए जाने वाले इसके ग्रेड पर टिप्पणी कीजिए।

(c) फेन प्लवन प्रक्रम में विभिन्न प्रकारों के रूपांतरकों पर और उनकी भूमिका पर चर्चा कीजिए।

8.(a) 'लैंथेनाइडों' के क्या सामान्य अभिलक्षण होते हैं ? किस कारण से कोन्ड्राइट सामान्यीकृत आरेख के द्वारा किसी शैल में दुर्लभ मृदा की प्रचुरता को व्यक्त किया जाता है ? सीई (सोरियम) ईयू (यूरोपियम) असंगति का शैलोत्पत्ति महत्व क्या है ? 

(b) उपयुक्त उदाहरणों के साथ समाकृतिकता एवं बहुरूपता की परिभाषा दीजिये । विभिन्न प्रकारों की बहुरूपताएं क्या-क्या हैं ? 

(c) रेडियोऐक्टिव अपशिष्ट रूपों के क्या-क्या विभिन्न प्रकार हैं ? उनको भूवैज्ञानिक निक्षेपस्थान में किस प्रकार निपटाया जाता है ? 

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