(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा विधि Paper-1 - 2019

UPSC CIVIL SEVA AYOG

संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा (Download) UPSC IAS Mains Exam 2019 विधि (Paper-1)

खण्ड ‘A’

Q1. निम्नलिखित प्रश्नों में से प्रत्येक का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए : 

(a) महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों की सहायता से, केन्द्र और राज्यों के मध्य विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित ‘सार और तत्त्व' (पिथ और सब्सटैंस) के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए। 

(b) “ 'लोकपाल' के पद का उद्देश्य न्याय-निर्णयन करना नहीं है, अपितु प्रशासन के विरुद्ध शिकायतों के अन्वेषण के लिए एक अलग और अनौपचारिक नियमित व्यवस्था (तंत्र) प्रदान करना है ।” भारत में लोकपाल' के पद के औचित्य के प्रतिपादन के साथ, इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए ।

(c) "नैसर्गिक न्याय को शीघ्रता और निष्पक्षता के साथ देने के लिए 'औडि औल्टरम पार्टम' (दूसरे पक्ष को सुनो) नियम अत्यंत नम्य, लचीली और अनुकूलनशील संकल्पना है ।" निर्णयज वाद-विधि की सहायता से कथन का परीक्षण कीजिए ।

(d) “संसदीय-विशेषाधिकारों का मुद्दा संसद और न्यायपालिका के मध्य विवाद और झगड़े की जड़ बना रहा है ।” विनिर्णीत वादों की पृष्ठभूमि में इस कथन का विश्लेषण कीजिए ।

(e) “निजता का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत वर्णित प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के एक अंतर्भूत अंग के रूप में संरक्षित है ।” इस कथन का न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टास्वामी (अवकाश प्राप्त) बनाम भारत संघ के निर्णय के आलोक में विशदीकरण कीजिए । 

Q2. (a) (i) प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित प्रशासनिक अधिकरणों के विशेष उल्लेख के साथ भारत में अधिकरणों के विस्तार पर समीक्षा दीजिए।

(ii) “भारत में पंचायती राज प्रणाली को पुनरुज्जीवित करना न्यायपालिका पर कार्यभार को कम करने के सहायक के रूप में है ।” टिप्पणी कीजिए ।

(b) “संसद की संविधान का संशोधन करने की शक्ति व्यापक तो है, परन्तु असीमित नहीं है ।" क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? विवेचना कीजिए कि क्या आधारिक संरचना के सिद्धान्त ने संविधान में न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति को प्रबलित किया है अथवा नहीं । (c) भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों की शक्तियों की प्रकृति का परीक्षण कीजिए और इसका अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय की शक्तियों से विभेद कीजिए। 

Q3. (a) प्रशासन को प्रत्यायोजित विधान की शक्ति प्रदान करते हुए, सामर्थ्यकारी अधिनियम में अनुसरण किए जाने वाले प्रक्रिया संबंधी रक्षोपायों को विनिर्दिष्ट किया जाना चाहिए । अधिनियम में अधिकथित अनिवार्यताओं के अननुपालन के क्या परिणाम होते हैं ? विनिश्चयित वादों की सहायता से विवेचना कीजिए।

(b) “भारत का निर्वाचन आयोग भारत में निर्वाचन प्रक्रिया के प्रशासन के लिए उत्तरदायी एक स्वायत्तशासी संवैधानिक प्राधिकरण है ।" भारत के निर्वाचन आयोग की शक्तियों और प्रकार्यों की व्याख्या करते हए टिप्पणी कीजिए ।

(c) “इंडिया अर्थात् 'भारत', राज्यों का संघ होगा ।” व्याख्या कीजिए । क्या आपके विचार में भारतीय संविधान एक परिसंघीय संविधान है ? विनिश्चयित वादों की सहायता से विवेचना कीजिए। 

Q4. (a) 'विधि-शासन' से आपका क्या अभिप्राय है ? विधि-शासन के डायसी के सिद्धान्त का आधारिक तत्त्व यह है कि 'आप कितने भी उच्च हों, विधि आपसे भी ऊपर है' । विनिश्चयित वादों की सहायता से इसकी विवेचना कीजिए। 

(b) राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति की विवेचना कीजिए । क्या अध्यादेश की विधिमान्यता को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है ? सुसंगत वाद-विधि को उद्धृत कीजिए।

(c) निम्नलिखित कथनों का परीक्षण और व्याख्या कीजिए :

(i) लोक हित मुक़दमेबाज़ी न्यायपालिका की राजनीति को बढ़ावा देने का एक साधन है।

(ii) न्यायिक सक्रियता के न्यायपालिका पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रभाव होते 

खण्ड 'B' 

Q5. निम्नलिखित प्रश्नों में से प्रत्येक का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए : 

(a) “अन्तर्राष्ट्रीय विधि विधिशास्त्र का लोपी बिन्दु है ।” व्याख्या कीजिए । 

(b) राज्य-मान्यता से आपका क्या अभिप्राय है ? मान्यता के विधिक प्रभाव क्या हैं ? तथ्यतः और विधितः मान्यता में विभेदन कीजिए ।

(c) स्व-रक्षा के अपने अन्तर्निहित अधिकार के प्रयोग में, राज्यों के द्वारा विधिपूर्ण बलप्रयोग को नियन्त्रित करने वाली अन्तर्राष्ट्रीय विधि के क्या नियम हैं ?

(d) अन्तर्राष्ट्रीय लोकोपकारी विधि और अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार विधि के मध्य क्या अन्तर है ? 

(e) अन्तर्राष्ट्रीय विवादों के शान्तिपूर्ण समाधान के विभिन्न तरीकों की संक्षिप्त विवेचना कीजिए। क्या आप समझते हैं कि समाधान के यह तरीके (ढंग) प्रभावी हैं या कि वर्तमान परिदृश्य में अन्य कोई तरीके (ढंग) की आवश्यकता है ? 

Q6. (a) अन्तर्राष्ट्रीय विधि और देशीय विधि के मध्य सम्बन्धों को विनिर्धारित करने वाली प्रचलित विभिन्न थ्योरियाँ क्या-क्या हैं ? भारत में राष्ट्रीय न्यायालयों द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय विधि को किस प्रकार लागू किया जाता है ?

(b) निम्नलिखित की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए : 

(i) निर्दोष मार्ग का सिद्धान्त

(ii) अनन्य आर्थिक क्षेत्र और उस पर अन्य राज्यों के अधिकार 

(c) “अन्तर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की प्रभाविता राज्यों द्वारा प्रदत्त सहयोग की मात्रा पर निर्भर करती है । यह सहयोग न केवल अन्तर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के राज्य-पक्षकार से संबद्ध होता है, बल्कि अपक्षकार राज्य से भी संबद्ध होता है ।” विवेचना कीजिए।

Q7. (a) राज्यों की प्रादेशिक अधिकारिता से आप क्या समझते हैं ? क्या आप इस अभिमत से सहमत हैं कि शरण माँगने का अधिकार अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार विधि के अधीन पूर्णत: स्थापित है ? यदि ऐसा है, तो कारणों सहित अपने उत्तर की संपुष्टि कीजिए ।

(b) परीक्षण कीजिए कि किस दूरी और सीमाओं तक एक संधि, एक तीसरे राज्य, जो संधि का पक्षकार नहीं है, को अधिकार प्रदान कर सकती है और दायित्व आरोपित कर सकती है।

(c) “संयुक्त राष्ट्र को राष्ट्रीय सीमाओं के पार जाने वाले मुद्दों, जिन्हें एक राष्ट्र द्वारा अकेले सुलझाया नहीं जा सकता है, को सुलझाने वाले सबसे महत्त्वपूर्ण मंच के तौर पर नामित किया जाता है।” इस कथन के आलोक में महासभा के प्रकार्यों पर चर्चा कीजिए।

Q8. (a) निम्नलिखित पर समालोचनात्मक टिप्पणियाँ लिखिए : 

(i) मानव पर्यावरण के संरक्षण और सुधार की दिशा में अन्तर्राष्ट्रीय प्रयास

(ii) राज्य प्रायोजित आतंकवाद

(b) व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबन्ध संधि (सी.टी.बी.टी.) के प्रमुख प्रावधानों की विवेचना कीजिए । साथ ही उन कारणों की भी व्याख्या कीजिए कि भारत ने इस संधि को क्यों हस्ताक्षरित नहीं किया है।

(c) प्रशुल्कों और व्यापार पर साधारण करार (गैट) के ऐतिहासिक उद्भव, उद्देश्यों और प्रमुख सिद्धान्तों की व्याख्या कीजिए । 

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