(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - दर्शनशास्त्र (प्रश्न-पत्र-2)-2011

 

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(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा-2011 दर्शनशास्त्र (प्रश्न-पत्र-2)

खण्ड़ ‘A’

1. निम्नलिखित सभी चार भागों का उत्तर दें। प्रत्येक उत्तर 150 शब्दों से अधिक न हो : 

(क) कौटिल्य के संप्रभुता के सप्तांग सिद्धांत एवं बोदाँ के राज्य के संप्रभुता के सिद्धांत की तुलना करें।

(ख) जनतंत्र में नागरिक को क्या कभी भी कानून के उल्लंघन का नैतिक अधिकार होता है ? नागरिकों के सविनय अवज्ञा के अधिकार पर चर्चा करें।

(ग) 'बहुसंस्कृतिवाद' पद का प्रयोग विवरणात्मक एवं मूल्यात्मक दोनों रूप में हुआ है। चर्चा करें।

(घ) क्या मृत्युदण्ड औचित्यपूर्ण है ? दंड के सिद्धांतों के संदर्भ में उत्तर दीजिये। 

2. निम्नलिखित सभी तीन भागों में प्रत्येक के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए : 

(क) क्या नागरिकों को कर्तव्यों के बिना अधिकार प्राप्त हो सकते हैं ? उदाहरणों सहित चर्चा करें।

(ख) कांट द्वारा दिये गए कर्तव्य के संपूर्ण एवं असंपूर्ण दायित्व के सिद्धांत की चर्चा करें।

(ग) क्या जातिप्रथा से ग्रस्त समाज में नागरिकों के अधिकार' का प्रत्यय निर्वाहित किया जा सकता है ? चर्चा करें।

3. निम्न सभी तीन भागों का उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए:: 

(क) मार्क्सवाद एवं समाजवाद के मौलिक भेद क्या हैं ?

(ख) क्या यह कहा जा सकता है कि समाजवाद मार्क्सवाद का एक कमज़ोर संस्करण है ? चर्चा करें। -

(ग) क्या जनतांत्रिक समाजवाद एक आत्मव्याधाती अवधारणा  है? चर्चा करें।

 

4. निम्न सभी तीन भागों का लगभग 200 शब्दों में उत्तर दीजिए : 

(क) न्याय की अवधारणा का आधारभूत विचार निष्पक्षता है। चर्चा करें।

(ख) क्या सामाजिक लिंग भेदभाव के मुद्दे न्याय निष्पक्षता के विचार से निस्तारित किये जा सकते हैं ? चर्चा करें।

(ग) आपके अनुसार न्याय का कौन-सा सिद्धांत जाति भेदभाव की समस्या का समाधान करने में सर्वाधिक सहायक होगा और क्यों ? 

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खण्ड 'B'

5. निम्नलिखित सभी भागों का उत्तर दीजिये जो प्रत्येक 150 शब्दों से अधिक न हो : 

(क) परंपरागत शास्त्रीय धर्म के मूल लक्षणों पर चर्चा कीजिये ।

(ख) उस विचार की परीक्षा करें जिसके अनुसार नैतिकता का आधार केवल धार्मिक संरचना में ही संभव है।

(ग) ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के प्रमाण, धर्म के विकास के लिये क्यों आवश्यक हैं ? चर्चा कीजिये ।

(घ) “धर्म न केवल असत्य है, वह हानिकारक भी है।" चर्चा करें। 

6. प्रत्येक भाग पर लगभग 200 शब्दों में उत्तर दीजिए : 

(क) क्या विलियम जेम्स का यह कहना सही है कि धार्मिक विवाद सौन्दर्य बोध के विवाद के समान होते हैं ? चर्चा करें।

(ख) क्या धार्मिक सिद्धांत एवं विवाद सत्यापनीय हैं ? चर्चा करें।

(ग) इस धारणा की चर्चा करें जिसके अनुसार धार्मिक सिद्धांत 'छद्म-वैज्ञानिक' सिद्धांत न होकर जीवन शैली का प्रतिनिधित्व करते हैं।

7. प्रत्येक भाग का उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए : 

(क) सत्य के इस सिद्धांत की चर्चा करें : "एकं सत् विप्राः बहुधा वदन्ति ।"

(ख) क्या निरपेक्ष सत्य का विचार असहिष्णुता एवं धार्मिक विवादों को उत्पन्न करता है,? चर्चा करें।

(ग) सत्य के संबंध में धार्मिक विवादों का समाधान किस प्रकार किया जा सकता है ? चर्चा करें।

8. प्रत्येक भाग का लगभग 200 शब्दों में उत्तर दीजिए : 

(क) क्या आत्मा की अमरता में विश्वास धर्म की पूर्वमान्यता है ? चर्चा करें।

(ख) क्या पुनर्जन्म एवं पुनरवतरण का विश्वास आत्मा के अमरत्व के विचार के अभाव में संभव है ? चर्चा करें।

(ग) क्या बौद्धमत, अपने 'अनत्त' के विचार के कारण, धर्म माना जा सकता है अथवा नहीं ? चर्चा करें।

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Courtesy : UPSC