(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - दर्शनशास्त्र (प्रश्न-पत्र-2)-2016

 

UPSC CIVIL SEVA AYOG

(Download) संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा - मुख्य परीक्षा-2016 दर्शनशास्त्र (प्रश्न-पत्र-2)

खण्ड़ ‘A’

Q1.निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का लगभग 150 शब्दों में उत्तर दीजिए : 

(a) “संप्रभुता नागरिकों तथा प्रजा पर सर्वोच्च शक्ति है, जो विधि द्वारा परिबाधित नहीं है ।” विवेचना कीजिए। 

(b) राउल्स के अनुसार सुव्यवस्थित समाज न्याय की जन अवधारणा द्वारा प्रभावी रूप से नियमित होता है । क्या आप इससे सहमत हैं ? कारण स्पष्ट कीजिए। 

(c) “समाजवाद स्वयं में लोकतंत्र की पूर्णता है ।” विश्लेषण कीजिए । 

(d) इस कथन का मूल्यांकन कीजिए कि प्रत्येक मानव को कुछ अविच्छेद्य (अदेय) अधिकार प्राप्त हैं। 

(e) "दंडित करने का उद्देश्य व्यक्ति में सुधार लाना होना चाहिए ।” टिप्पणी प्रस्तुत कीजिए । 

Q2. (a) क्या स्वतन्त्रता आत्मज्ञान प्राप्ति के लिए सकारात्मक एवं समान अवसर है ? विवेचना कीजिए। 

(b) किन आधारों पर लैस्की ने संप्रभुता से संबद्ध ऑस्टिन की अवधारणा की आलोचना की ? 

(c) “स्वतन्त्र भाषण के अधिकार में न्यायपालिका की प्रामाणिक स्वतन्त्रता अंतर्निहित है और यह उसे कार्यपालिका से पूर्णत: अलग करता है ।” मूल्यांकन कीजिए। 

Q3. (a) क्या हम राज्य को शासक वर्गों की इच्छाओं को व्यक्त करने की संस्था मानते हैं ? परीक्षण कीजिए। 

(b) “प्रभुत्व से मुक्ति” को क्या हम बहुसांस्कृतिकवाद के लिए एक वजह (औचित्य) मान सकते हैं ? कारणों सहित अपना उत्तर प्रस्तुत कीजिए। 

(c) क्या यह सम्भव है कि सामाजिक प्रगति का मापन आर्थिक विकास के इतर (स्वतंत्र) कर लिया जाए ? विवेचना कीजिए । 

Q4. (a) “जहाँ तक मेरा सम्बन्ध है मैं नारीत्व को कमज़ोर लिंग नहीं मानता । यह दोनों में से अधिक महान् है ।" गाँधी के इस कथन का मूल्यांकन कीजिए। 

(b) क्या आप सहमत हैं कि सामूहिक मीमांसा तथा निर्णयन के द्वारा महिलाएँ सशक्त हो सकती हैं ? विवेचना कीजिए। 

(c) ऐतिहासिक तथा सामाजिक परिप्रेक्ष्यों के आधार पर अम्बेडकर ने जाति व्यवस्था का किस प्रकार विश्लेषण किया ? व्याख्या कीजिए । 

खण्ड "B"

Q5. निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का लगभग 150 शब्दों में उत्तर दीजिए : 

(a) आधुनिक संवेदनशीलता तथा निरंकुश ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण' एक-साथ नहीं चल सकते हैं । इस विचार पर अपनी समालोचना प्रस्तुत कीजिए । 

(b) “विश्व-धर्म एक प्रकार से आध्यात्म एवं मानवता का सम्मिश्रण है ।” मूल्यांकन कीजिए। 

(c) क्या धार्मिक निरपेक्षवाद धार्मिक बहुतत्त्ववाद के लिए ख़तरा है ? विवेचना कीजिए। 

(d) बौद्ध धर्म आत्मा के अमरत्व पर विश्वास नहीं करता, परन्तु पुनर्जन्म की घटना पर विश्वास करता है । परीक्षण कीजिए। 

(e) आस्था का अर्थ ईश्वर के प्रति मानव की जागरूकता है; परन्तु यह विवेकहीन नहीं हो सकता । विश्लेषण कीजिए। 

Q6. (a) श्रुति मूर्त रूप में वक्तव्यों या प्रतिज्ञप्तियों में व्यक्त की गई सत्यों से बनी होती है । परन्तु यह तर्क से परे नहीं हो सकती है । विवेचना कीजिए । 

(b) प्राच्य (पूर्वी) धर्मों में मानव और संसार की तुलना तथा विषमता प्रस्तुत कीजिए। 

(c) दर्शाइए कि ईश्वर के अन्तर्यामित्व (अंतर्वर्तिता) तथा इंद्रियातीत गुण किस तरह उनके सर्वव्यापकता तथा अनन्तता को प्रदर्शित करते हैं। 

Q7. (a) रहस्यवादी अनुभव की प्रकृति तथा वैधता का उल्लेख एवं मूल्यांकन कीजिए ।

(b) "नैतिकता के सिद्धान्त तब अधिक कारगर होंगे जब वे किसी धर्म से स्वाधीन तथा असम्बद्ध हों।” विवेचना कीजिए।

(c) “यह कहना ही स्वत: विरोधाभासी होगा कि कल्पना की जा सकने वाली सर्वाधिक सिद्ध सत्ता में अस्तित्व में होने के लक्षणों का अभाव होता है ।” विश्लेषण कीजिए । 

Q8. (a) “यदि ईश्वर सर्वशक्तिमान है, तब तो सभी प्रकार की बुराइयों को समाप्त करने की ईश्वर की इच्छा अवश्य रही होगी; परन्तु संसार में नैतिक तथा प्राकृतिक बुराइयाँ उग्र रूप से प्रचलित हैं ।” एक ईश्वरवादी/आस्तिक की इस पर क्या प्रतिक्रिया होगी ?

(b) धार्मिक भाषा से सम्बन्धित विभिन्न विचारों के मध्य कौन-सा विचार अधिक संतोषजनक है तथा क्यों ? 

(c) “प्रकृति की दुनिया उतनी ही जटिल तथा स्पष्टत: रूपांकित है जितनी कि एक घड़ी ।" मूल्यांकन कीजिए।

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