(Sample Material) सामान्य अध्ययन (पेपर -1) ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम: भारत और विश्व का भूगोल - "वायुमंडलीय आर्द्रता"

सामान्य अध्ययन ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का (Sample Material)

विषय: भारत और विश्व का भूगोल

वायुमंडलीय आर्द्रता

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वायुमंडल की आर्द्रता

वायुमंडल में उपस्थित आर्द्रता को वायुमण्डल की आर्द्रता कहते हैं। कम अनुपात (0 से 5%) में होते हुए भी यह वायुमण्डल का महत्त्वपूर्ण घटक है। यह वायुमण्डल में तीनों रूपों में रहता है। यह गैसीय अवस्था में जलवाष्प, तरल अवस्था में जल की बूँदों तथा ठोस अवस्था में हिमकणों के रूप में होता है। स्थान तथा समय के अनुसार इसकी मात्रा में परिवर्तन आता रहता है।

जलवाष्प का स्रोत एवं वितरण (Source and Distribution of Water Vapour)

जैसा कि पहले बताया गया है, जल तीनों अवस्थाओं (गैस, तरल तथा ठोस) में रहता है। ये तीनों अवस्थाएँ परस्पर परिवर्तनशील हैं। बर्फ पिघलने पर तरल हो जाती है और कभी-कभी उध्र्वपातन (Sublimation) की प्रक्रिया द्वारा सीधे जलवाष्प में बदल जाती है। अधिकांश जलवाष्प महानगरों, नदियों, झीलों, हिमक्षेत्रों तथा हिमनदियों से प्राप्त होता है जो कुल जलवाष्प का लगभग 75 प्रतिशत प्रदान करते हैं। महासागरों का धरातल वायुमंडलीय जलवाष्प का सबसे बड़ा स्रोत है।

वाष्पीकरण (Evaporation)

जल के तरल से गैसीय अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। एक ग्राम जल को जलवाष्प में परिवर्तित करने के लिए लगभग 600 कैलोरी ऊर्जा का प्रयोग होता है। इसे वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) कहते हैं।

पृथ्वी के सभी जलीय भागों, जैसे समुद्र, झीलें, तालाब, नदियाँ आदि से हर तापमान पर वाष्पीकरण होता रहता है। इस प्रकार का क्षेत्रा कुल मिलाकर पृथ्वी के धरातल का 75% है। परन्तु वाष्पीकरण हर स्थान पर एक-सा नहीं होता। वाष्पीकरण की मात्रा निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है:

1. तापमान - जल को जलवाष्प में परिवर्तित करने की शक्ति सूर्य से प्राप्त होती है। अर्थात् जलवाष्प की मात्रा तापमान पर निर्भर करती है। जितना तापमान अधिक होगा, उतना ही वाष्पीकरण भी अधिक होगा। उष्ण कटिबन्धीय भागों मंे ध्रुवीय क्षेत्रों की अपेक्षा बहुत ही अधिक वाष्पीकरण होता है, जिसका मुख्य कारण ध्रुवों पर तापमान का काम होना है। इसी प्रकार दिन में रात्रि की अपेक्षा तापमान अधिक होता है तथा वाष्पीकरण भी अधिक होता है। ग्रीष्म ऋतु में शीत ऋतु की अपेक्षा अधिक वाष्पीकरण का कारण भी तापमान ही है।

2. वायु की शुष्कता - वायु जितनी अधिक शुष्क होगी, वाष्पीकरण भी उतना ही अधिक होगा। इसके विपरीत, यदि वायु में पहले ही आर्द्रता अधिक है तो वाष्पीकरण कम होगा।

3. बादल - जब आकाश में बादल छाए हुए होते हैं तो वे सूर्य से आने वाली ऊष्मा को पृथ्वी पर पहुँचने से रोकते हैं और वाष्पीकरण की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं। अतः अधिक वाष्पीकरण के लिए मेघरहित आकाश का होना अवश्यक है।

4. जल क्षेत्रा का विस्तार - जल क्षेत्रा जितना बड़ा होगा वाष्पीकरण भी उतना ही अधिक होगा। समुद्री भागों में स्थलीय भागों की अपेक्षा अधिक वाष्पीकरण होता है।

5. पवन का वेग - पवन का वेग जितना अधिक होगा उतना ही वाष्पीकरण भी अधिक होगा।

आर्द्रता (Humidity)

वायुमण्डल में उपस्थित जलवाष्प को वायुमण्डल की आर्द्रता कहते हैं। पृथ्वी के जलीय भागों में जो जल वाष्पीकृत होकर गैस का रूप धारण करता है, वह वायुमण्डल में मिल जाता है। वायु की जलवाष्प शोषण (Absorb) करने की एक निश्चित सीमा होती है जो वायु के तापमान पर निर्भर करती है। आर्द्रता को ग्राम प्रति घन मीटर में नापा जाता है। किसी निश्चित तापमान पर एक घन मीटर वायु जितने ग्राम जलवाष्प शोषण कर सकती है उसे वायु की शोषण करने की क्षमता (Capacity to Absorb Water Vapour) कहते हैं। जब किसी वायु में उसकी क्षमता के बराबर जलवाष्प आ जाए तो उसे संतृप्त वायु (Saturated Air) कहते हैं। यह मात्रा तापमान में वृद्धि के साथ-साथ बढ़ती जाती है। उदाहरणतः 10 डिग्री सेल्सियस तापमान पर एक घन मीटर वायु 11.4 ग्राम जलवाष्प ग्रहण कर सकती है। यदि वायु का तापमान 21 डिग्री सिल्सियस हो जाए तो यह 22.2 ग्राम जलवाष्प ग्रहण कर सकेगी।

आर्द्रता के प्रकार (Kinds of Humidity) आर्द्रता निम्नलिखित तीन प्रकार की होती है:

  1. निरपेक्ष आर्दता (Absolute Humidity) वायु की प्रति इकाई आयतन में विद्यमान जलवाष्प की मात्रा को निरपेक्ष आर्द्रता कहते हैं। इसे ग्राम प्रति घन मीटर में व्यक्त किया जाता है।

  2. विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity) वायु के प्रति इकाई भार में जलवाष्प के भार को विशिष्ट आर्द्रता कहते हैं। इसे ग्राम प्रति किलोग्राम की इकाई में मापा जाता है।

  3. सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) किसी भी तापमान पर वायु में उपस्थित जलवाष्प तथा उसी तापमान पर उसी वायु की जलवाष्प धारण करने की क्षमता के अनुपात को सापेक्ष आर्द्रता कहते हैं। इसकी कोई इकाई नहीं होती। इसे प्रतिशत मात्रा में व्यक्त किया जाता है।

सापेक्ष आर्द्रता निम्नलिखित दो बातों पर निर्भर करती है:

  1. जलवाष्प की मात्रा - वायु में जितने अधिक जलवाष्प होंगे उतनी ही अधिक सापेक्ष आर्द्रता होगी।
  2. वायु का तापमान - वायु का तापमान कम हो जाने से सापेक्ष आर्द्रता बढ़ जाती है और तापमान बढ़ जाने से सापेक्ष आर्द्रता कम हो जाती है। संतृप्त वायु की सापेक्ष आर्द्रता 100% होती है। यदि वायु के तापमान में आवश्यक कमी आ जाए तो जलवाष्प की मात्रा को बढ़ाये बिना भी वायु संतृप्त हो सकती है। इसी प्रकार यदि संतृप्त वायु का तापमान बढ़ जाए तो यह असंतृप्त हो सकती है।


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