यूपीएससी आईएएस (मेन) हिन्दी अनिवार्य परीक्षा पेपर UPSC IAS (Mains) Hindi Compulsory Exam Paper - 1998

यूपीएससी आईएएस (मेन) हिन्दी अनिवार्य परीक्षा पेपर UPSC IAS (Mains) Hindi Compulsory Exam Paper - 1998

Time Allowed: 3 Hours

Maximum Marks: 300

Candidates should attempt ALL questions. The number of marks carried by each question is indicated at the end of the question.

1. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर लगभग तीन सौ शब्दों का निबन्ध लिखिएः 100

(क) ख.डित समाज
(ख) हम राजनीतिज्ञ
(ग) पू$ट - हमारा पतन
(घ) बीसवीं शताब्दी वे$ पश्चात्
(ङ) जीवन को आगे बढ़ना ही है
(च) प्रगति का मूल्य

2. निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों वे$ उत्तर अपने शब्दों में लिखिएः 60

पुस्तकों की वृद्धि हेतु ही मुद्रण कला का अविष्कार हुआ, यद्यपि समाचार-पत्रा, विज्ञापन और व्यावसायिक पर्चों की मुद्रण कला मेरे क्षेत्रा वे$ अन्दर नहीं आते, जिससे मुद्रक अपनी कला और जेब भरने वे$ अवसर ढूँढ़ते हैं। इस अविष्कार का सबसे महत्त्वपूर्ण परिणाम यह हुआ कि इसने ग्रंथकारिता को बड़े पैमाने पर महान और (जब प्रकाशन व्यापार का उदय हुआ) अधिक लाभदायक बनाया। मुद्रण-काल से पूर्व और मुद्रण-कला वे$ प्रारम्भिक दिनों लेखक उस ‘महान घर’ का नौकर था - पूर्व गबैया वे$ पद का पुनः अवतरण। गेयत्व से हस्तलेखन तक, हस्तलेखन की वृद्धि के तंग मार्ग से मुद्रण कला तक, इसी तरह यह कार्य जारी रहा जिसने ग्रंथकारिता को खुले बाजार में महत्त्व एवं ग्रंथकर्त्ता को स्वतंत्राता प्रदान की। एलिजाबेथ-काल में ग्रंथकर्ता एक संरक्षक से अर्धबन्धित रहा, जो मुद्रक और पुस्तक-विक्रेता से पेशा अथवा सेवावृत्ति वे$ रूप में अधिक पाने की आशा करता रहा। डॉ. निकोल स्मिथ वे$ अनुसार एक पुस्तिका का सामान्यतया चालीस सिलिंग मूल्य था। प्रतिफल देने का एक आम तरीका, लेखक को पुस्तक की कई प्रतियों देना ही रहा, जिन्हें विक्रय करवे$ वह लाभ ले सवें$। कभी-कभी लेखक को पुस्तक और पैसे दोनों दिए जाते थे। उदाहरणार्थ जॉन स्टो ने ‘दी सर्वे ऑफ लन्दन’ वे$ लिए तीन पौंड और चालीस प्रतियां प्राप्त की।

सामान्य अध्ययन सिविल सेवा मुख्य परीक्षा अध्ययन सामग्री

(क) लेखक को मुद्रणालय द्वारा प्रदान की गई स्वतंत्राता की रीतियों का उल्लेख कीजिए।
(ख) मुदणालय वे$ अविष्कार का क्या कारण है? इसने क्या-क्या अवसर प्रदान किए?
(ग) मुद्रणालय वे$ अविष्कार से पूर्व पुस्तक - प्रकाशन से संरक्षक की भूमिका क्या थी? उनवे$ नीतिकरण का क्या स्थान है?
(घ) गेयत्व से हस्तलेखन तक वे$ परिवर्तन से लेखक को क्या लाभ मिला?
(ङ) मुद्रणालय वे$ अविष्कार वे$ पूर्व और पश्चात् की स्थिति का संक्षेप में विवरण प्रस्तुत कीजिए। विशेष रूप से लेखक की आमदनी पर।

3. निम्नलिखित अवतरण का सारांश लगभग दो सौ शब्दों में लिखिए। सारांश यथासम्भव आपवे$ अपने शब्दों में हो। उसे निर्धारित कागज पर लिखे और उत्तर-पुस्तिका वे$ भीतर सुरक्षित टॉक दीजिए अपने उत्तर में प्रयुक्त शब्दों की संख्या का उल्लेख कर दें। 60

आपको यह अवश्य मालूम होगा कि हमारी पृथ्वी काफी पुरानी हैµलाखों µ करोड़ों वर्ष पुरानी। बहुत लम्बे समय तक इस पर मनुष्य अथवा स्त्राी का निवास नहीं था। मनुष्य वे$ आने वे$ पूर्व जानवर मात्रा थे और जानवरों वे$ भी आने वे$ पूर्व एक ऐसा समय था जब किसी भी तरह वे$ जीव इस पृथ्वी पर नहीं थे। आज हमारा संसार विभिन्न प्रकार वे$ जानवरों और मनुष्यों से ऐसा भरा है कि इनवे$ बिना संसार की कल्पना करना भी कठिन है। किन्तु वैज्ञानिकों और पृथ्वी का अध्ययन करने वाले और विचारकों वे$ विचार है कि ऐसा भी एक समय था जब पृथ्वी इतना गर्म थी कि इस पर कोई जीव रह ही नहीं सकता था। जब हम उनकी पुस्तकों को पढ़ते हैं और चट्टानों तथा जीवाश्मों (पुराने जानवरों वे$ अवशेष) का अध्ययन करते हैं तो हम स्वयं समझ सकते हैं कि यह ऐसा अवश्य रहा होगा।

आप पुस्तकों में इतिहास पढ़ते हैं किन्तु पुरातन काल में जब मनुष्य ही नहीं था तो निस्संदेह पुस्तवें$ नहीं लिखी गई होंगी। अब हम यह वै$से पता लगा सकते हैं कि उन दिनों क्या हुआ होगा? बैठे-बैठे हम इसकी कल्पना नहीं कर सकते। यह बहुत ही दिलचस्प बात होगी कि हम जो चाहे कल्पना कर सकते हैं और बहुत-सी खूबसूरत काल्पनिक कथाओं का सृजन भी कर सकते हैं किन्तु यह जरूरी नहीं कि यह यथार्थ हो। जब तक कि यह आँखों-देखे तत्त्वों पर आधारित न हो। यद्यपि उन दिनों पुस्तवें$ लिखी ही नहीं गई। यह सौभाग्य है कि हमारे पास वु$छ ऐसी वस्तुएं हैं जो पुस्तकों वे$ समान ही बहुत वु$छ बताती है|

हमारे पास चट्टानें, पर्वत, समुद्र, तारे नदियाँ, रेगिस्तान और पुराने जानवरों वे$ अवशेष है। ये सभी चीजें पुस्तकों वे$ समान ही हैं जो पृथ्वी की प्रारम्भिक कहानी को बताती है। इस कहानी को सच्चे अर्थों में समझने वे$ लिए दूसरों की पुस्तवें$ पढ़ने वे$ बजाय प्रकृति की महान पुस्तक की गहराइयों में बैठना ही बेहतर होगा। में आशा करता हूँ कि आप शीघ्र ही चट्टानों और पर्वतों से यह कहानी पढ़ना सीखेंगे। कल्पना करें, यह कहानी कितनी आकर्षक होगी। प्रत्येक छोटा पत्थर जो आप सड़कों पर अथवा पर्वतों वे$ पास देखते हैं वह प्रकृति की पुस्तक का एक छोटा-सा पृष्ठ हो सकता है और यदि आप उसे पढ़ना जानते हैं तो वह आपको वु$छ बता पाएगा। कोई भी भाषा - हिन्दी, उर्दू अंग्रेजी ही उसे पढ़ने वे$ लिए आपको उसकी वर्णमाला सीखनी होगी। इसी तरह प्रकृति की कहानी पत्थर या चट्टान-रूपी पुस्तक को पढ़ने वे$ लिए आपको उसकी वर्णमाला पहले सीखनी होगी। अब शायद आप इसवे$ बारे में थोड़ा बहुत पढ़ना जानते हें। अगर आप एक छोटे गोलाकार चमकीले पत्थर को देखते हैं तो क्या ऐसा नहीं लगता कि वह आपको वु$छ बता रहा है। वह वै$से गोलाकार, चिकना और चमकीला बना जिसमें किसी तरह का कोना या खुददुरापन नहीं। अगर आप एक बड़ी चट्टान को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ेंगे तो प्रत्येक टुकड़ा खुरदुरा और बहुत से नोक वाला होगा और उसवे$ नौक भी कठोर होंगे। यह गोलाकार, चिकने पत्थर वे$ समान नहीं होता तो फिर यह पत्थर वै$से गोल, चिकना और चमकीला हुआ। अगर आपवे$ पास इसे देखने वे$ लिए आँखें और सुनने वे$ लिए कान है तो यह अपनी कहानी बताएगा। यह अपसे कहता है कि एक समय में यह हो सकता है बहुत पहले चट्टान का टुकडा रहा हो, ऐसा एक टुकड़ा जो आप बड़ी चट्टान से तोड़ते हैं। जिसवे$ कई कोने और नोवें$ हो सम्भवतः यह किसी पर्वत वे$ किनारे पर पड़ा हो, तब बरसात उसको एक छोटी सी तराई तक ले गई हो जहां से पर्वतीय झरने ने उसे बहाते -बहाते एक नदी में पहुँचा दिया हो और उस छोटी-सी नदी ने उसे एक बड़ी नदी में ले गई। सारा समय यह नदी की तलहटी में ढुलकता रहा और इसवे$ जो कोने थे सब घिस गए और इसका खुरदुरापन धीरे-धीरे पिटकर चिकना और चमकदार हो गया। इस प्रकार वह एक छोटा चमकीला पत्थर बना जो आप देखते हैं किसी तरह नदी ने उसे पीछे छोड़ दिया और आपको मिला। यदि नदी उसे ले जाती तो वह छोटा होते-होते अन्त में बालू कण बन जाता है और इसवे$ अन्य भाइयों वे$ साथ समुद्र वे$ किनारे मिलकर एक सुन्दर समुद्र तक बन जाता, जहां छोटे बच्चे बालू से खेलने और बालू वे$ किले बनाते। यदि एक छोटा चमकीला पत्थर इतना वु$छ बता सकता है तो समस्त चट्टानों, पर्वतों और अन्य चीजें जो हम अपने आस पास देखते हैं उनसे हम और कितनी अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

4. निम्नलिखित अवतरण का हिन्दी में अनुवाद कीजिएः 20

It was only in the Eighteenth Century that people in Europe began to think that mountains are beautiful. Before that time, they were feared by the inhabitants of the plain, and especially by the townsmen, to whom they were wild, dangerous places in which one was lost or killed by terrible animals. Townsmen saw, in their cities, the victory of Man over Nature, of civilisation, order, peace and beauty over what was wild, curel, disorderly and ugly.

Slowly, however, many of the people who were living comfortably in this town civilisation began to grow tired of it. Many has many instincts in his breast, some of the which fight against others: one of these instincts is to explore the Unknow, not be satisfied with a life in which everything is orderly and peaceful and easily understood, but to look for mystery, for things which the reason cannot explain, for sights and sounds which produce in one a thrill of fear.

So, in the Eighteenth Century, people began to turn away from the man-made town to the untouched country and particularly, to places where it was dangerous, rough and disorderly. Wild rocks and high mountains began to take their place in poems and novels, and the Lake District in North -west England, with its mountains and lakes, became a popular place for a holiday.

Then, mountain climbing began to grow popular as a sport. To some people, there is something enormously atrractive about setting otut to conquer a mountain: a struggle against Nature is is finer than a battle against other human beings.

5. निम्नलिखित अवतरण का अंग्रेजी में अनुवाद कीजिएः 20

वास्तव में सादा जीवन क्या है? क्या इसका तात्पर्य अपनी आवश्यकताओं को कम करना है? क्या इसका अर्थ है कि हम कम से कम कपड़े पहनें? क्या इसका अर्थ है कि हम भोजन कम से कम खाएॅ? सादा जीवन आपेक्षिक है सम्पूर्ण नहीं। यह सभ्यता वे$ उस स्तर पर निर्भर है जिस पर एक आदमी जीता है क्या वु$छ लोगों की विलासिता है वही वु$छ लोगों वे$ लिए आवश्यक। किन्तु हमें यह मालूम है कि सादा-जीवन क्या है? व्यर्थ और हानिकारक वस्तुओं वे$ उपयोग से बचना ही सादा जीवन है। यह हमारे शरीर की स्वाभाविक आवश्यकताओं की पूर्ति, आराम, और स्फुर्ति को पैदा करता है। दूसरे शब्दों में, सादा जीवन आधिक्य और प्रदर्शन से बचना है। सादा जीवन व्यतीत करना निस्संदेह लाभकारी है। वस्तुनिष्ठ प्रगति पर आधारित आराम का जीवन स्वस्थ नहीं होता। सादा जीवन उच्च विचार दोनों वांछनीय है। उच्च विचार का अर्थ कदापि नहीं कि वे$वल ईश्वर दर्शन और धर्म वे$ बारे में ही सोच-विचार करे। वे समस्त विचार जो हमारे जीवन स्तर को उ$ँचा बनाएँ, उच्च विचार है। उच्च विचार से तात्पर्य जीवन वे$ उदात्त आदर्श और मूल्यों वे$ प्रति आस्था जैसे सत्य, सौंदर्य, कला, विज्ञान, धर्म, समाज सेवा आदि। ऐसा एक व्यक्ति जो इन मूल्यों की तलाश में अपना जीवन व्यतीत करता है, उच्च विचार वाला व्यक्ति कहा जाता है।

6. (क) निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों में से किन्हीं पाँच वे$ अर्थ लिखिए और वाक्यों में प्रयोग कीजिएः 20

(i) ईद का चाँद होना
(ii) आस्तीन का साँप
(iii) चोर की दाढ़ी में तिनका
(iv) नाच न जाने आँगना टेढ़ा
(v) कलेजे पर पत्थर रखना
(vi) घर की मुर्गी दाल बराबर
(vii) थोथा चना बाजे घना
(viii) मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक
(ix) दुम दबाकर भाग जाना
(x) बीड़ा उठाना

(ख) निम्नलिखित युग्मों में से किन्हीं पाँच को इस प्रकार वाक्यों में प्रयोग करें कि युग्मों वे$ अन्तर स्पष्ट हो जाएँ : 10

(i) मान - अपमान
(ii) मुख - आमुख
(iii) सज्जन - साजन
(iv) मूल्य - मूल्यांकन
(v) प्राचीन - नवीन
(vi) झूठा - जाली
(vii) पृष्ठांकन - अनुमति
(viii) अनुशासन - प्रशासन
(ix) श्रद्धा - दया
(x) भाई - बहन

(ग) निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं पाँच वाक्यों वे$ शुद्ध रूप लिखिएः 10

(i) मैंने कल मुम्बई जाने को है।
(ii) घी बहुत अच्छी नहीं है।
(iii) इस दुकान में आलू और सब्जी नहीं मिलते
(iv) पू$लों पर हिम बिन्दुएँ चमक रही हैं।
(v) माता-पिता पर आदर रखना चाहिए
(vi) मैं पढ़ने का नित्य व्यायाम करता हूँ।
(vii) वह कक्षा का सर्वश्रेष्ठ अच्छा छात्रा है।
(viii) कलकत्ता से अनेक पत्रा और पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है।
(ix) पियार और घिरणा मुनुष्य-जीवन की परभावी संवेदनाएँ हैं।
(x) मोहन की व्यवहार अच्छी नहीं।

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