यूपीएससी आईएएस (मेन) हिन्दी अनिवार्य परीक्षा पेपर UPSC IAS (Mains) Hindi Compulsory Exam Paper - 2006

यूपीएससी आईएएस (मेन) हिन्दी अनिवार्य परीक्षा पेपर UPSC IAS (Mains) Hindi Compulsory Exam Paper - 2006

Time Allowed: 3 Hours

Maximum Marks: 300

Candidates should attempt ALL qestions. Answers must be written inHindi (Devanagari Script) unless otherwise directed. In the case of Question No. 3, marks will be deducted of the precis is much longer or shorter than the prescribed length.

1. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिएः 100

(क) इतिहास: तथ्य या कल्पना।
(ख) उच्च कार्यालयों में अनीति और भ्रष्टाचार।
(ग) शहरी भारत मं बदलते खाद्याभ्यास।
(घ) नियति-विषयक भारतीय अवधारणा।
(ङ) क्या हम पश्चिम का अंधानुकरण कर रहे हैं?

2. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए तथा उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में लिखिएः 60

हम सारे संसार में कानूनी व्यवस्था में मौजूद उस अन्याय की अनदेखी करते हैं जिसमें नारी को परिपूर्ण अधिकार से वंचित किया गया है। बहुत से स्थानों पर पुरुष वारिस की अपेक्षा नारी वारिस को पैतृक सम्पत्ति का हिस्सा कम मिलता है। तलाक-विषयक असमान कानून के कारण नारी क्रूर वैवाहिक बंधन में बँधे रहने के लिए विवश रहती है। और अदालती कानून के अनुसार एक पुरुष की तुलना में दो महिलाओं को गवाही देनी पड़ती है। उसी तरह अन्य क्षेत्रों में भी हमारी दृष्टि बहुत संवु$चित है। इस अपने देश के आर्थिक जीवन में महिलाओं के अवदान की अनदेखी करते हैं। बैंक ऋण, प्रारंभिक नौकरी तथा प्रोन्नति के क्षेत्रा में बहुत सी जगहों पर महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। उन्हें पुरुषों के समान वेतन नहीं दिया जाता है या प्रायः वु$छ भी नहीं दिया जाता है। इस असंगत व्यवस्था के कारण उन्हें गरीबी का जीवन जीना पड़ता है। इस तरह विश्व के गरीबों में महिलाओं का अनुपात सत्तर प्रतिशत है।

इसी प्रकार ने सुनने का बहाना करके अन्याय के इस चक्र को हम बढ़ावा ही देते हैं। सबके लिए स्वतंत्राता और समानता सर्वप्रथम इस बात पर निर्भर है कि सभी नागरिक समान रूप से अपनी बात कह सवें$। यह कहा जाता है कि सार्वभौम घोषणा का प्रारूप बनाते समय भी नारी की अभिव्यक्ति की आजादी के संबंध में विवाह हुआ था। इसके प्रारंभिक प्रारूप के प्रथम अनुच्छेद में कहा गया था, ‘‘सभी पुरुष समान रूप से निर्मित हुए’’। श्रीमती हँसा मेहता के नेतृत्व में आयोग की महिला सदस्यों ने इस ओर ध्यान दिलाया कि ‘‘सभी पुरुष’’ की व्याख्या में महिलाओं को छोड़ने की बात भी आ सकती है। काफी देर तक बहस के पश्चात् ही उक्त शब्दावली को इस रूप में परिवर्तित किया गया, ‘‘सभी मनुष्य जन्म से ही स्वतंत्रा और समान है।’’ आज भी हम महिलाओं की आवाज को नहीं सुनना चाहते। बहुत सी जगहों पर अपने देश के राजनीतिक जीवन में उन्हें भाग नहीं लेने दिया जाता।

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प्रश्नः

(क) गद्यांश में उल्लिखित आर्थिक भेदभाव की चर्चा कीजिए।
(ख) महिलाओं को किस प्रकार के कानूनी अन्याय का सामना करना पड़ता है।
(ग) लेखक को ऐसा विश्वास क्यों है कि महिलाओं की आवाज नहीं सुनी जाती?
(घ) आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि भाषा के संबंध में महिलाएँ संवेदनशील हैं?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में महिलाओं के संबंध में किस प्रकार के विचारों को प्रचारित किया गया है?

3. निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण लगभग 200 (दो सौ) शब्दों में अपनी भाषा में कीजिए। यदि संक्षेपण इस कार्य के लिए निर्धारित कागज पर नहीं लिखा जाएगा और संक्षेपण का आकार निर्दिष्ट सीमा से अधिक या कम होगा तो अंक काट दिए जाएँगे। संक्षेपण में प्रयुक्त शब्दों की संख्या अंत मंे लिखिए तथा संक्षेपण कागज को उत्तर-पुस्तिका के भीतर यथोचित रूप से नत्थी कर दीजिएः 60

जब हम भारत के इतिहास की ओर देखते है, जो प्राचीन काल में भारतवर्ष या हिन्दुस्तान के नाम से जाना जाता था, तो पाते हैं कि हजारों वर्षों से एक भौगोलिक और सांस्कृतिक इकाई के रूप में इसका अस्तित्व था। लेकिन राजनैतिक इकाई की दृष्टि से एक सुसंहत राष्ट्र या साम्राज्य के रूप में इसका अस्तित्व अशोक, गुप्तवंश, हर्षवर्द्धन, अकबर और अंत में अंग्रेजों के शासनकाल में ही दिखाई पड़ता है। भारतभूमि पर कई ऐसे महान् राजा हुए जिन्होंने विशाल साम्राज्य की स्थापना की और जिन्होंने बहुत दिनों तक शासन भी किया। लेकिन एक राजनैतिक इकाई के रूप में भारत का संघटन निश्चय ही ब्रिटिश शासन का परिणाम है। भारत और पाकिस्तान के बँटवारे के पूर्व ही श्रीलंका और वर्मा ने अपना स्वतंत्रा अस्तित्व प्राप्त कर लिया था। 1947 में जब एक स्वतंत्रा राष्ट्र के रूप में भारत का आविर्भाव हुआ तब जनसंख्या कीे दृष्टि से चीन के बाद संसार का यह दूसरा देश था और इसका खूनी गृहयुद्ध अभी समाप्त भी नहीं हुआ था।

वस्त्रा उद्योग, धातुसामग्री तथा रत्न एवं आभूषण के निर्माण केन्द्र के रूप में औद्योगिक क्रांति के पूर्व तक भारत को जो महत्त्व था उसे वर्षों ब्रिटिश शासन ने योजनाबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया। भारतवर्ष ब्रिटेन के कारखानों के उत्पादों का सुरक्षित बाजार बन गया। भारतवर्ष में उपलब्ध कच्चे माल के विशाल भंडार तक ब्रिटेन का एकाधिकार प्रवेश हो गया। परिणामस्वरूप ब्रिटेन में भारत के संसाधनों का भारी मात्रा में स्थानान्तरण हुआ और जो अंततः भारत की गरीबी का कारण बना। भारतवर्ष में प्राचीन प्रचलित पारंपरिक शिक्षा और स्वास्थ्य-व्यवस्था समाप्त हो गयी।

लेकिन इस निष्कर्ष पर पहुँचा सही नहीं होगा कि भारत को ब्रिटेन के संपर्व$ का कोई लाभ नहीं मिला। बहुत से भारतीयों विशेषतः नवयुवकों को इस बात की जानकारी नहीं होगी कि उन्नीसवीं सदी के मध्य में भारत के ब्रिटिश शासन ने ठगों को समाप्त करने के लिए वै$से कठोर कदम उठाये थे। सारे भारतवर्ष में पै$ले हुए वे सुसंगठित अपराधी गिरोह थे जिनका काम था निर्दोष और असहाय लोगों, मुख्यतः व्यापारियों और यात्रियों को लूटना। ठगों का नाश करने के लिए भारतवर्ष एक अंग्रेज मेजर विलियम स्लीमैन और उसके सहयोगियों का ऋण और आभारी रहेगा। अभी भारत के विभिन्न भागों में विभिन्न प्रकार के उग्रवाद को देख कर कभी-कभी ऐसा लगता है कि क्या ठगों वाला वह पुराना बुरा दिन पुनः लौट आएगा। हम सबको मिलकर यथासंभव कानून के हाथ इतने मजबूत करने चाहिए कि निर्दोष नागरिक लूटखसोट, अपहरण, और ऐसे ही अन्य प्रकार के खतरों से भयरहित हो कर शांतिपूर्वक जीवन निर्वाह करते हुए उपार्जन कर सवें$।

राजस्व प्रशासन, कानून और व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, भूसंपत्ति तथा भवन और अन्य प्रकार की संपत्ति के अधिकार को मुख्यवस्थित करने की दृष्टि से भी हम ब्रिटिश शासन के आभारी हैं। भारतवर्ष में मुगल साम्राज्य तथा उसके भी पहले मौर्य और गुप्त काल में प्रचलित प्रशासनिक व्यवस्था को उन्होंने अंगीकार किया।

भारत के महाराजे और नवाबों ने भी अपने द्वारा शासित राज्यों (जैसे मैसूर और हैदराबाद) में भी भारत में अंग्रेजों द्वारा शासित राज्यों में प्रचलित राज्यशासन व्यवस्था को अपनाया। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में मेकॉले ने एक नयी शिक्षा-नीति को प्रचलित किया जिससे ब्रिटिश राज्य के भारतीय प्रशासन में क्लर्व$ का कार्यभार लेने में भारतीय सक्षम हो सवें$। सारे देश में अंग्रेजी तथा अन्य विषयों की शिक्षा की व्यवस्था और विद्यालयों के निर्माण के लिए पहल की गई। बाद में वु$छ और कदम उठाये गये, जैसे नदियों के जल का उपयोग करते हुए कृषि-व्यवस्था को समुत्रात बनाने के लिए सिंचाई-परियोजना और नागरिक चिकित्सा तथा स्वास्थ्य-सुविधा का प्रावधान। उसके बाद रेल-यातायात और डाक तथा तार की व्यवस्था ने इस विशाल उपहाद्वीप को एक संगठित आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रा के रूप में जोड़ा। यद्यपि प्रारंभ में इन आधारभूत ढाँचों की योजना ब्रिटिश लोगों और साम्राज्य के उपयोग के लिए की गयी थी लेकिन इनसे स्वतंत्रा भारत को विकास के लिए निश्चय ही एक अच्छा
आधार मिला। अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और शिल्पगत विरासत के बावजूद स्वतंत्राता के समय भारत एक ऐसे अविकसित देश के रूप में जाना जाता था जहाँ गरीबी है, लोग अल्पायु वाले हैं और जहाँ साक्षरता का प्रतिशत बहुत कम है।

4. निम्नलिखित अंग्रेजी गद्यांश का हिन्दी में अनुवाद कीजिएः

With the modern day inventions, we are able to fly like birds and swim like fish. Man has even walked on the surface of the moon. But, us human beings, we are not at peace—neither with ourselves nor with the world around us. In fact, we are under tremendous stress. We are struggling with our inner selves at all times. If we look at our lives, we find that we are virtually at war with the world around us. On the one hand, the world talks about globalisation and aims at a borderless world. On the other hand, we sorry about petty personal gains.

The only solution to this problem is that we need to work towards changing our mindset. The Buddha had said, centuries ago, that a human being can be free from the cycle of birth and death by the 'renuciation of desire'. Human desires can be fought and go rid of. A human being can, by repeated practice, bring his mind under control and can attain the state of liberation—from the negative thoughts and emotions. However, to be liberated from thse thoughts and desires, one must be aware of them first. By this method, misery can be put to an end, and real happiness can be attained. (Words: 212)

5. निम्नलिखित हिन्दी गद्यांश का अंग्रेजी में अनुवाद कीजिएः 20

नये तथ्यों और नयी स्थितियों की अवहेलना करना मनुष्य के दिमाग की आदत है। जब वाष्प इंजन का आविष्कार हुआ तब ‘महान् इंजिनियरों’ सहित ज्ञानी लोगों ने कहा कि ऐसी चीजें कभी उपयोगी नहीं होंगी। साथ ही, इस प्रकार की बातें कहीं जाने लगी कि यदि लोग ‘प्रति घंटे बीस मील की भयंकर रफ्तार’ वाली इस गाड़ी पर हमेशा चढेंगे तो उनकी मृत्यु हो जाएगी और रेलपथ के पास खड़े लोग भी मारे जाएँगे, इसलिए पटरी को दोनों ओर से घेर देने के लिए उ$ँची दीवार बना देनी चाहिए। हर्वे ने जब रक्त-संचालन विषयक अपनी खोज की घोषणा की तब डॉक्टरों ने उसकी हँसी उड़ाई और पहले की तरह हीµएक दिन दायीं ओर से तो दूसरे दिन बायीं ओर से और कभी दोनों से नारंगी के जूस की तरह अपने रोगियों को खून चढ़ाते रहे। चालीस वर्ष की आयु से उ$पर के किसी भी डॉक्टर ने हर्वे की खोज की सत्यता को स्वीकार नहीं किया।

अपने वर्तमान समय में भी हम यह पाते हैं कि पहले की तरह आज भी सत्य अस्वीकार्य और अलोकप्रिय है। जीवन बीमा का कोई विशेषज्ञ आपको बताएगा कि पिछली अर्धशताब्दी में मानव की आयु सीमा दूस वर्ष अधिक हो गयी है। अब से दो या तीन सौ वर्ष बाद जब दवाओं और अच्छे भोजन के द्वारा बीमारियों पर विजय प्राप्त कर लिया जाएगा तथा वु$छ अन्य शत्राुओं को दबा दिया जाएगा तब लोगों की औसत उम्र लगभग सौ वर्ष हो जाएगी। क्या लोग जीने की कला सीख रहे हैं?

6. (क) निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों में से केवल पाँच का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिएः 20

(i) अँगूठा दिखाना
(ii) अपने पाँव आप वु$ल्हाड़ी मारना
(iii) कागजी घोड़े दौड़ना
(iv) खटाई पड़ना
(v) चिराग तले अँधेरा
(vi) तिल का ताड़ करना
(vii) पट्टी पढ़ाना
(viii) नौ-दो ग्यारह होना
(ix) नाच न जाने आँगन टेढ़ा
(x) एक पन्थ दो काज

(ख) निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं पाँच वाक्यों के शुद्ध रूप लिखिएः 10

(i) अपना माता-पिता की सेवा करनी चाहिए।
(ii) राम और लक्षमण का जन्म अयोध्या में हुए थे।
(iii) तुम कौन से गाँव से आए हो? (iv) मैंने कानपुर जाना है।
(v) प्रत्येक व्यक्तियों को काम करना चाहिए।
(vi) सीता खाना खायी।
(vii) ताजमहल का शान निराली है।
(viii) कमाल के पास में बैठो।
(ix) मैं अपा काम पूरा कर लिया।
(x) मैंने उनकी प्रतीक्षा देखी।

(ग) निम्नलिखित युग्मों में से किन्हीं पाँच को वाक्यों में इस प्रकार प्रयुक्त कीजिए कि उनका अर्थ स्पष्ट हो जाए और उनके बीच का अन्तर भी समझ में आ जाएः 10

(i) अथक - अकथ
(ii) अतुल - अतल
(iii) वं$काल - वं$गाल
(iv) दमन - दामन
(v) निशा - नशा
(vi) उपेक्षा - अपेक्षा
(vii) धरा - धारा
(viii) उद्धार - उधार
(ix) प्रसाद - प्रसाद
(x) बहु - बहू

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