यूपीएससी आईएएस (मेन) हिन्दी अनिवार्य परीक्षा पेपर UPSC IAS (Mains) Hindi Compulsory Exam Paper - 2007

यूपीएससी आईएएस (मेन) हिन्दी अनिवार्य परीक्षा पेपर UPSC IAS (Mains) Hindi Compulsory Exam Paper - 2007

Time Allowed: 3 hours

Maximum Marks: 300

Candidates should attempt All questions. Answers must be written in Hindi (Devanagari Script) unless otherwise directed. In the Case of Question No. 3, marks will be deducted if the precis is much longer or shorter than the prescribed length.

1. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिएः 100

(i) हम में श्रम की गरिमा का अभाव है।
(ii) वास्तविक शिक्षा घर से आरम्भ होती है।
(iii) बचपन की स्मृतियों का महत्त्व।
(iv) संबंधियों से मिलने जाना/आना हो सकता है सुखद न हो।
(v) संक्षिप्तता हाजिर-जवाबी की आत्मा है।

2. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए तथा उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में लिखिएः 60

हमारे कुछ नौजवान अपनी गहरी हताशा में हिंसा के तरीके अपनाते रहे जो पूर्णतः व्यर्थ थे। व्यक्तिगत स्तर के आतंकी कारनामे घटते रहे जिनका कि वृहत्तर संदर्भों में कोई मूल्य न था। दूसरी तरफ उस काल के हमारे कुछ नेताओं की राजनीति इतनी शक्तिहीन थी कि उससे कुछ भी नतीजे नहीं हासिल हुए। इसी कारण इन दोनों रास्तों के बीच हम जान नहीं पाये कि हमें क्या करना है? भारतीय सामाजिक जीवन के उस काल-ख.ड के कुछ नेताओं द्वारा संस्तुत रास्ते का अनुकरण करना तो तुच्छतापूर्ण कार्य लगा, दूसरी ओर यह पूरी तरह ही दोषपूर्ण और अर्थहीन लगा कि हम आतंकी तरीके अपनाएँ जो अपने आप में बुरे थे ही उनसे किसी प्रकार के परिणाम मिलने की संभावना भी न थी। ऐसे समय में दृश्यपटल पर गाँधी जी अवतरित हुए और उन्होंने हमें राजनैतिक कार्यवाही का एक रास्ता प्रदान किया। यह एक विषम रास्ता थाµएक नया रास्ता। महान लोग इसे पहले भी बता चुके थे परन्तु इसमें एक अन्तर था कि गाँधी जी ने लोकव्यापी राजनैतिक कार्यवाही में उसे जोड़ दिया था। वह कुछ ऐसा ज्ञान था जिसे व्यक्ति अपने व्यक्तिगत जीवन में करने के लिए पहले से दीक्षित था, सहसा उसे लोकव्यापी जनान्दोलन में अंगीकार करने के लिए कहा गया और वह भी विस्तृत देश की बड़ी जनसंख्या से जो शिक्षा की दृष्टि से निरक्षर, प्रशिक्षण शून्य और पूर्णतः डरी हुई थी। अपने डर से वे लोग इतने आविष्ठ थे कि जो भी उनके निकट आता चाहे वह सरकारी अभिकरण का व्यक्ति हो या कि महाजनी व्यवस्था का, वह उन्हें लतियाता और मुकियाता। वे लोग जो भी हों उनसे बुरा व्यवहार किया जाता। उन्हें अपने उस विकराल दुःख से कभी कोई छुटकारा नहीं मिला जिसे वे शांतिपूर्वक झेलते थे। ठीक ऐसे समय में गाँधी आए और उन्होंने लोगों को एक तरीका बताया µ स्वतन्त्राता प्राप्त करने का रास्ता।

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(i) स्वतन्त्राता प्राप्त करने के वे दो रास्ते कौन-से थे, जो गाँधी के आने से पहले विद्यमान थे?
(ii) हरेक रास्ते में क्या-क्या दोष थे?
(iii) गाँधी जी द्वारा सुझाया रास्ता किस अर्थ में नया था?
(iv) लोकव्यापी राजनैतिक कार्यवाही के बारे में ऐसा असाधारण उल्लेखनीय क्या था?
(v) गाँधी जी ने जब नेतृत्व संभाला तब लोगों की दशा वै$सी थी?

3. निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण लगभग 200 (दो सौ) शब्दों में अपनी भाषा में कीजिए। यदि संक्षेपण इस कार्य के लिए निर्धारित कागज पर नहीं लिखा जाएगा और संक्षेपण का आकार निर्दिष्ट सीमा से अधिक या कम होगा तो अंक काट दिए जाएँगे।

संक्षेपण में प्रयुक्त शब्दों की संख्या अंत में लिखिए तथा संक्षेपण कागज को उत्तर-पुस्तिका के भीतर यथोचित रूप से नत्थी कर दीजिएः 60

जब से मनुष्य को दुःसाध्य एवं विरोधी पर्यावरण का पता चला गया था, तभी से वह उस विरोध पर काबू पाने के तरीकों और साधनों को सोच निकालने पर मजबूर हो गया था और उसी के भीतर विज्ञान का अंकुर छुपा हुआ था। इसका कारण यह है कि यद्यपि विज्ञान की परिभाषा ज्ञान के एक व्यवस्थित निकाय के रूप में दी जाती है, तथापि इस ज्ञान को अर्जित करने का तरीका अपने में उस परिभाषा का एक अनिवार्य भाग है। समान प्रकृति के बार-बार होने वाले आमने-सामने और अनुभव अवश्य ही मनुष्य द्वारा बनाई गई सबसे पहली परिकल्पनाओं का आधार रहे होंगे और उसके बाद अनुभव ही वह बात रही होगी जिसके परिणामस्वरूप परिकल्पना की संतुष्टि या निराकरण हुआ होगा। यही उस इंद्रियानुभववाद की प्रारंभिक अवस्था रही होगी, जो अनौपचारिक लेकिन वास्तविक आगमनोत्मक एवं निगमनात्मक कार्यविधियों पर आधारित और समर्थित रही होगी। इसका निहितार्थ यह भी होगा कि मानव मन में कुछ ऐसा अंतर्जात है, जो विज्ञान को संभव बना देता है। आवश्यक रूप से, यह बिल्कुल वही चीज है जो सभ्यता को संभव बनाती है।

यद्यपि विज्ञान और समाज विषय उतना ही पुराना है कि जितना स्वयं मानव जीवन है, तथापि उसकी प्रासंगिता और महत्त्व में पिछले तीन सौ सालों में अपूर्व वृद्धि हुई है। इसका कारण ढूंढ निकालना कोई कठिन बात नहीं है। आधुनिक विज्ञान भी मौटे तौर पर उसी आयु का है। उसकी दूरगामी खोजों और आविष्कारों ने इतिहास की गति को तेज कर दिया है और सामाजिक एंव आर्थिक परिवर्तन विज्ञान के लंबे-लंबे कदमों की बराबरी नहीं कर पाए हैं। होता क्या है कि कुछ प्रतिभाशाली व्यक्ति ज्ञान के अपने शुद्ध प्रेम और जिज्ञासा के बूते नई-नई बातें खोज निकालने में सफल हो जाते हैं। इसी को शुद्ध विज्ञान कहा जाता है और एक लंबे प्रक्रम की पहली अवस्था होती है। इसके पश्चात्, भिन्न प्रकार और स्तर की योग्यता वाले लोगों का कोई और सैट पहले की खोजों के प्रकाश में चीजों का निर्माण करता है कोई संपादित करता है। इस अवस्था को अनुप्रयुक्त विज्ञान कहा जाता है। विज्ञान की खोजों के सभी अनुप्रायोगिक इस्तेमाल प्रौद्योगिकी कहलाने योग्य हो जाते हैं और प्रौद्योगिकी ही वह चीज है, जो उत्पादन की विधा में क्रांतिकारी परिवर्तन लाती है तो तत्पश्चात् समाज पर दूरगामी प्रभाव डालते हैं। प्रौद्योगिकी के द्वारा पैदा हुए भौतिक परिवर्तन सदैव ही मानव विचारण और अभिवृत्तियों में प्रतिबिंबित नहीं होते हैं। सामाजिक यथार्थ अपने मनोवैज्ञानिक प्रतिपक्ष के मुकाबले ज्यादा तेजी से बदलता है। हमारे युग के अभिलाक्षणिक तनाव के अधिकांश का कारण यही काल-पश्चता कही जा सकती है।

जब हम विज्ञान और समाज की बात करते हैं, तब हम पाते हैं कि इन्हीं दो प्राचलों के बीच विचारों का विकास होता है; यह विकास विज्ञान के अनुप्रयोग के माध्यम से पैदा हुए भौतिक परिवर्तनों के, और उन परिवर्तनों का अवशोषण करने, आत्मसात् करने और लाभ उठाने की मानव की क्षमता के वास्तविक परिणाम होते हैं। उदाहरण के लिए, पहले भाप और उसके पश्चात् शक्ति के अन्य रूपों की प्राप्यता को और उसके साथ-साथ असैंबली लाइन और पंुज उत्पादन को ही लीजिए। इसका एक परिणाम तो रेल इंजन या और दूसरा परिणाम मोटरगाड़ी था। दोनों ने ही सामाजिक जीवन की गुणता और रूपों को बदल डाला है। केवल एक उदारहण लेते हुए, रेल इंजन ने तो पिकारों का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया और मोटरगाड़ी ने दूरी को रफ्तार के द्वारा हरा दिया।

इसी से संबंधित दो परिणाम बड़ी जनसंख्या का परिवहन की आदिम विधाओं पर निर्भरता और धनवानों और निर्धनों, मोटरकारों के मालिकों और सार्वजनिक परिवहन के उपयोक्ताओं, के बीच की बढ़ी हुई खाई है। इन दोनों ने बारी’बारी से समाज पर प्रभाव डाला है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि एक ऐसी परिस्थिति बन गई, जिसमें भौतिक रफ्तार की मांगों का मानव मनोविज्ञान में संगत परिवर्तन के साथ मेल नहीं बिठाया जा सका। इस परिणामी द्वंद्व ने भी समाज पर प्रभाव डाला, यद्यपि वह प्रभाव तुरंत बोधगम्य तरीकों से नहीं था।

विज्ञान और समाज के बीच आदर्श संबंध तो वह होगा, जिसमें मनुष्य का मानसिक दृष्टिकोण और अभिवृत्तियां, विज्ञान की खोजों के उपयोग के द्वारा पैदा हुए प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों के साथ निरंतर कदम से कदम मिला कर चलेंगी। इस क्षण तो ऐसी कोई संभावना हमारी पहुँच तक कहीं भी दिख नहीं रही है।

4. निम्नलिखित अंग्रेजी गद्यांश का अनुवाद हिन्दी में कीजिएः

The earth and the sun are the sources of life and if we keep away from them for long, life begins to ebb away. Modern industrialized communities have lost touch with the soil and do not experience that joy which nature gives and the rich glow of health which comes from contact wiht mother earth.

They talk of nature's beauty and go to seek it is occasional week-ends, litering the countryside with the products of their own artificial lives, but they cannot commune with nature or feel part of it. It is something to look at and admire, because they are told to do so and then return with a sigh of relief to their normal haunts; just as they might try to admire some classic poet or writer and then, wearied by the attempt, return to their favourite novel or detective story, where no effort of mind is necessary. They are not children of nature, like the old Greeks or Indians but strangers paying an embarrassing call on a scarce-known distant relative. And so they do not experience that joy in nature's rich life and infinite variety and that feeling of being intensely alive which came so naturally to our forefathers.

5. निम्नलिखित हिन्दी गद्यांश का अंग्रेजी में अनुवाद कीजिएः 20

मशीनों ने वह सारा समय जो हमारे लिए बचा दिया है और जो नई र्उ$जा हमें प्रदान की है, हम उनका क्या उपयोग करते हैं? समग्र रूप से यह स्वीकार करना ही होगा कि हम उनका बहुत कम उपयोग करते हैं।
अधिकांशतः हम, अपने समय और र्उ$जा का उपयोग और भी ज्यादा और बेहतर मशीनें हमें केवल और भी ज्यादा समय और भी ज्यादा र्उ$जा प्रदान करेंगी, तब हम उनका क्या करेंगे?

मेरे विचार में इसका उत्तर यह है कि हम अधिक सभ्य बनने का प्रयास करना चाहिए। कारण यह है कि स्वयं में मशीनें और मशीनों ने जो शक्ति हमें दी है, वे सभ्यता नहीं है, परंतु सभ्यता के लिए साधन हैं। रेलगाड़ी में प्रवेश करना कोई खास सभ्यतापूर्ण कार्य नहीं है। परंतु आप इस बात से सहमत होंगे कि सभ्य होने का अर्थ सुंदर वस्तुओं का निर्माण करना और पसंद करना, मुक्त रूप से विचार करना, सही ढंग से जीवन बिताना और मनुष्य और मनुष्य के बीच बराबरी के साथ न्याय को बनाए रखना है। इन चीजों को करने के लिए मनुष्य के पास पहले कभी से भी ज्यादा बढ़िया अवसर प्राप्त हैं। उसके पास ज्यादा समय है, ज्यादा र्उ$जा है, भय करने और किसी के विरुद्ध लड़ने की बातें कम हैं।

यदि हम इस समय और र्उ$जा का इस्तेमाल ज्यादा सुंदर वस्तुओं के बनाने में, सृष्टि के संबंध में ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त करने में, राष्ट्रों के बीच झगड़ों के कारणों को समाप्त करने में, निर्धनता का किस प्रकार निवारण किया जाए इसको खोजने में करेंगे, तो मेरे विचार में निस्संदेह हमारी सभ्यता महानतम होगी क्योंकि वह जैसे कभी भी रही है उसके मुकाबले में अधिक चिरस्थायी होगी।

6. (क) निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों में से केवल पाँच का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिएः 20

(i) गाल बजाना
(ii) आधा तीतर आधा बटेर
(iii) जले पर नमक छिड़कना
(iv) झंडे गाड़ना
(v) छाती पर मूंग दलना
(vi) ईंट से ईंट बजाना
(vii) अंगारे उगलना
(viii) कागज काले करना
(ix) दूध का धुलाप होना।

(ख) निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं पाँच वाक्यों के शुद्ध रूप लिखिएः 10

(i) मां खाट पर बैठ पिताजी खड़ी रही।
(ii) रात में वह खुब सोया
(iii) इस बार नदि नाव से पार की।
(iv) उसकि सादी में खाना खाया।
(v) सीता जी जनकपुर का था।
(vi) लड़का सिधा है।
(vii) सरिता साड़ी पहनकर आया।
(viii) मेरे मां ने मुझे खाना दिया।
(ix) हवाई जहाज से चैन्ने जाउ$ँगा।
(x) सुनो दावाई खाने का समय हो गया।

(ग) निम्नलिखित युग्मो में से किन्हीं पाँच को वाक्यों में इस प्रकार प्रयुक्त कीजिए कि उनका अर्थ स्पष्ट हो जाए और उनके बीच का अन्तर भी समझ में आए जाएµ 10

(i) संताप - संतान
(ii) अगम - आगम
(iii) आसान - आसन
(iv) सामान - समान
(v) भावी - भाभी
(vi) सम्पत्ति - सम्मत्ति
(vii) साधन - साधना
(viii) कोश - कोष
(x) योजना - योजना
(x) मुफ्त - मुक्त।

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