यूपीएससी आईएएस (मेन) हिन्दी अनिवार्य परीक्षा पेपर UPSC IAS (Mains) Hindi Compulsory Exam Paper - 2015



यूपीएससी आईएएस (मेन) हिन्दी अनिवार्य परीक्षा पेपर UPSC IAS (Mains) Hindi Compulsory Exam Paper - 2015



1. निम्नलिखित में से किसी एक 600 शब्दों में

निबन्ध लिखिएः 100

(a) युवाओं में बढ़ता तनाव
(b) असफलता सफलता पाने का अगला कदम ह?ै
(c) क्या पढने की आदत में गिरावट आ रही ह?ै
(d) समाज में अंधविश्वासों से चलता संघर्ष

2. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढिए और उसके आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट, सही और संक्षिप्त भाषा में दीजिए। 12×5त्र60

रिपोर्ट्स बताती है कि भारत के कॉलेजों से आने वाले 80 प्रतिशत लोग रोजगार के लिए अयोग्य है। यूवा-पीढ़ी के संपर्क मंे रहने वालों में से एक, मै किन्तु सिर्फ इन आंकड़ों से असहमत होगा। युवाओं में सम्पर्क के आधार पर मैं केवल इतना कह सकता हूं कि उनमें करीब 90 प्रतिशत इसलिए रोजगार के अयोग्य है क्योंकि वे एकदम अनिश्चित व अनुत्तरदायी ह। युवा लोग, की पार्थ में रहते हुए गलतियाों की शुरूआत गलत-व्यवस्था से भरे विश्वास के साथ करते हैं। वे बहुत पैसा तो बनाना चाहते है किन्तु बिना कुछ किए हुए ही। ऐसा नहीं है कि वे बेकार है, अधिकांश अच्छी अंग्रेजी बोलते है और अपने बारे में विश्वास से भरे हैं। वे नवीनतम रिंगटोन्स, फिल्मों और चुटकुलों के जानकार है लेकिन जैसे ही कोई थोड़ा आगे बढ़ता है तो वे अपनी रिक्त आंखों से मुझे घूरने लगते है। वे बहुत पैसा कमना चाहते हैं, जिसके लिए मीडिया-हाइप और नियमित प्रकाशित होने वाले वेतन-सर्वो की धन्यवाद, लेकिन उनके पास वो दक्षता नहीं है जो कि उनको इस प्रकार से पैसा अर्जन करने में मदद करे। उनकी डिग्री का लिहाज करतेहुए स्नातक-स्तर के विषयों के कुछ प्रश्न पूछे, उनमें से अधिकांश एकदम हकलाने से लगते है। और, अतिरिक्त पढ़ाई के विषय में, कोई भी किसी निष्कर्ष को नहीं पढ़ पाता है। लेकिन यहां कुछ और प्रश्न भी है। सदाचार और व्यवहार के बारे में प्रश्न, आप में क्या अच्छा है, आप अपना अतिरिक्त समय कैसे व्यतीत करते हैं, और तब ये आश्वस्त लड़के व लड़कियों के समूह मेरे को इस संशय से ग्रस्त दिखलाई पड़ते हैं- ‘मुझे इन प्रश्नों का क्या उत्तर देना चाहिए? उनके यह कहना उचित नहीं है कि वह उनकी अपनी जिंदगी है और उनकोअपने बारे में मुझे बतलाना चाहिए, क्योकि वो हमेशा बने-बनाए तैयार उतर देना चाहते है, ऐसा कहना जो उनको सहायता देते हुए इससे मुक्त करे। वे कहते है कि- ‘‘यदि मैं यह अभ्यास पर्याप्त मात्रा में करूं, तो मैं ऐसा जरूर सिद्ध करूंगा।’’ इस तरह युवा लोग रातोरात लोलुप पाठक, गिटार-वादक, स्टार-बल्लेबाज और यहां तक कि अभिनेता तक हो जाते हैं। मुझे आश्चर्य है यदि कोई नासमझ भेटकर्ता उनकी आधी-अधूरी कहानियां पर विश्वास करे।

चूंकि, भारत आगे बढ़ रहा है, हमारे पास एक ऐसी लापरवाह पीढ़ी तैयार खड़ी है, जिसका एकमात्रा लक्ष्य बिना कुछ किए एक अच्छी जिंदगी जीना है। ऐसा प्रतीत होता है कि हम मुलम्मा चढ़ी ऐसी फौज निर्मित कर रहे हैं, जो बिना कुछ दर्शन, बिना वचनबद्धता या सदाचार से भरी है। अपनी चमड़ी को बचाने ओर कुछ उपयुक्त करने में किसी एक का चुनाव करने को कहने पर, अधिकांश युवाओं का जवाब दरअसल में अपने को बचाने का ही होगा। ऐसा माना जाता है कि जब हम युवा होते है तो हमारे अंदर कुछ आदर्शवाद विद्यमान होता है, हमारे विचार कुछ समझ नहीं निर्मित कर पाते किन्तू हम किसी प्रयोजन के प्रति खड़े होने के इच्छुक तो रहते हैं। आजकल के युवाओं में किसी प्रयोजन के प्रति कोई भावावेश नहीं होता। इस पीढ़ी के अत्यंत पर्वाभ्यास से विनिर्मित, उत्तरों को सुनकर मै समझता हूं कि नया मंत्रा पैसा है। इसके अलावा यदि कोई कुछ और महत्वपूर्ण बातें कहता है, तो वे पुरातन है।

(a) वे क्या वजहे हैं, जिनकें कारण युवा रोजगार के अयोग्य हैं?
(b) आज का युवा लेखक से क्या चाहता है?
(c) लेखक के अनुसार वर्तमान युवा पीढ़ी का एकमात्रा प्रयोजन क्या है?
(d) आज के युवा के बीच विचारणीय नया मंत्रा क्या है?
(e) वर्तमान युवा पीढ़ी का आदर्शवाद के प्रति क्या नजरिा है?

3. निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेप एक-तिहाई शब्दों में लिखिए। शीर्षक देने की आवश्यक्ता नहीं है। संक्षेप अपनी भाषा में लिखा जाना चाहिए। 60

रक्षा क्षेत्रा में विदेशों पर निर्भरता कम करना और आत्मनिर्भरता प्राप्त करना सामरिक, और आर्थिक दोनों कारणों से आज यह एक विकल्प के बजाय आवश्यकता है। सरकार ने अतीत में हमारे सशस्त्रा वालों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयुध निर्माणियों और सार्वजनिक क्षेत्रा के उपक्रमों के रूप मंे उत्पादन क्षमताओं का निर्माण किया। हालाकि, विभिन्न रक्षा उपक्रमों के उत्पादन की क्षमताओं को विकसित करने के लिए भारत में निजी क्षेत्रा की भूमिका बढ़ाने पर जोर देने की आवश्यकता है। विभिन्न वस्तुओं के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ जैसी एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अन्य वस्तुओं की अपेक्षा रक्षा उपकरणों के घरेलूे उत्पाद की अधिक जरूरत है, क्योंकि इनसे न केवल बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा चिन्ताओं को भी दूर किया जा सकेगा।

रक्षा क्षेत्रा मंे सरकार एकमात्रा उपभोक्ता है। अतः ‘मेक इन इंडिया’ हमारी खरीद नीति द्वारा संचालित होगी। सरकार की घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने की नीति, रक्षा खरीद नीति में अच्छी तरह परिलक्षित होती है। जहां ‘बाई इंडियन’ तथा ‘बाई एंड मेक इंडिया’ श्रेणियों का बाइ ग्लोबल से पहले स्थान आता है। आने वाले समय में आयात दुर्लभ से दुर्तगम होता जाएगा और जरूरी व्यवस्था के निर्माण और विकास के लिए सर्वप्रथम आकार भारतीय उद्योग को प्राप्त होगा। भले ही भारतीय कंपनियों की वर्तमान प्रौद्योगिकी के मामले में पर्याप्त क्षमता न हो, उन्हें विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की व्यवस्था और गठबंधन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

अब तक रक्षा क्षेत्रा में घरेलू उद्योग के प्रवेश के लिए लाइसंेस और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रतिबंध आदि को लेकर कई बाधाएं थी। रक्षा निनिर्माण क्षेत्रा में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अब कई नीतियों को उदार बनाया गया है। सबसे महत्वपूर्ण रक्षा क्षेत्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एम. डी. आई. नीति को उदार बनाया गया है। लाइसेंस नीति को भी उदार बनाया गया है और पटकों, हिस्से-पुर्जों, कच्चा माल, परीक्षण उपकरण, उत्पादन मशीनरी आदि को लाईसेंस के दायरे से बाहर रखा गया है। जो कंपनिया इस तरह की वस्तुओं का उत्पादन करना चाहती है, अब उन्हें लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।

रक्षा क्षेत्रा में घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर उपलब्ध है। एक तरफ जहां सरकार निर्यात, लाइसेंसिंग, एफ.डी.आई. सहित निवेश और खरीद के लिए निीति में जरूरी बदलाव कर रही है, वही उद्योग को भी जरूरी निवेश और प्रौद्योगिकी के मामले में उन्नयन करने की चुनौती को स्वीकार करने के लिए सामने आना चाहिए। रक्षा एक ऐसा क्षेत्रा है जो नवाचार से संचलित होता है और जिसमें भारी निवेश और प्रौद्योगिकी की आवश्यक है। लिहाजा उद्योग को भी अस्थायी लाभ के बजाय लंबी अवधि के लिए सोचने की मानसिकता बनानी होगी। हमें अनुसंधान विकास तथा नवीनतम विनिर्माण क्षमताओं पर ज्यादा ध्यान दनेा होगा। सरकार, घरेलू उद्योग हेतु एक ऐसी पारिस्थितिकी प्रणाली विकसित करने के लिए प्रसिद्ध है जिससे वह सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में बराबर के स्तर पर व्यावसायिक उन्नति कर सके।

4. निम्नलिखित गद्यांश का अंग्रेजी में अनुवाद कीजिएः

अरब देश का ज्यादा हिस्सा रेगिस्तान है। यहां चारों ओर रेत और चट्टाने हैं। रेत या बालू इतनी गर्म होती है कि दिन में नंगे पांव आप उस पर चल नहीं सकते। रेगिस्तान में इधर-उधर पानी के चश्में हैं, जो बहुत ही नीचे धरती पर उभरे हुए है, वे इतने नीचे है कि सूरज भी उन्हंे नहीं सोख सकता है तो वे चश्में बहुत कम परन्तु जहां भी कोई एक है वहां पेड़ लम्बे उगते है और बेहद सुन्दर दिखाई देते है, चश्मे के चारो ओर छायादार हरी अमराई बनाते हुए। ऐसी जगहों को मरूद्यान (ओएसिस) कहते हैं।

आदीवासी जो शहरों में निवास नहीं करते बास-भर रेगिस्तान में ही रहते हैं। वे तम्बुओं में रहते हैं, जो आसानी से गाड़े और उखाड़े जा सकते हैं, ताकि वे एक नखलिस्तान से दूसरे नखतिस्तान की ओर अपनी भेड़ों, बकरियों, उंटों और घोड़ों के लिए घास-पानी की खातिर जा सकें। रेगिस्तान अरब खूब पकी हुई अंजीरे और खजूर खाते हैं, जो खजूर के पेड़ों पा उगते है। वे उन्हें और फिर पूर बरस खाद्य पदार्थ के रूप में उनका उपयोग करते हैं।

इन अरबवासियों के पास संसार के सर्वोतम घोड़े हैं। एक आबवासी अपने सवारी घोड़े के कारण खुद को गौरवान्वित महसूस करता है और घोड़े को अपनी पत्नी और बच्चों जैसा ही प्यार करता हैं उंअ तो उसके खूबसूरत घोड़े से भी ज्यादा उपयोगी है, बहुत विशाल और ताकतवर भी। एक उंट लगभग दो घोड़ों से ज्याद असबाब ढो सकता है। अरब लोग अपने उंटों को सामान से खूब लादते हैं और रेगिस्तान में मीलों मील सवारी भी करते हैं। मानों वह सव में रेगिस्तान का जहाज हो। अक्सर उसे ऐसा ही पुकारा जाता है।

5. निम्नलिखित गद्यांश का हिन्दी मंे अनुवाद कीजिएः

Language and communication are something that children learn by talking to one another. But schools consider this an act of indiscipline. Instead, we have a special grammar class to learn language! One educationist remarked, “It is nice that children spend just a few hours at schools. If they spend all 24 hours in schools, they will turn out to be dumb!” it most schools, teacher talk, children listen. The same is true for other skills also. Children learn a great deal without being taught, by tinkering and pottering on their own.

Changes in the schools system, if they are to be of lasting significance, must spring from the actions of teacher in their classrooms, teachers who are able to help children collectively. New programmes, new materials and even basic changes in organizational structure will not necessarily bring about healthy growth. A dynamic and vital atmosphere can develop when teachers are given freedom and support to innovate. One must depend ultimately upon the initiative and respectfulness of such teachers and this cannot be promoted by prescribing continuously and in detail what is to be done.

In education, we can cry too much about money. Sure, we could use more, but some of the best classrooms and schools I have seen or heard of, spend far less per pupil than the average in our schools today. We often don’t spend well what money we have. We waste large sums on fancy buildings, unproductive administrative, staff, on diagnostic and remedial specialists, on expensive equipment that is either not needed, or underused or badly misused, on tons of identical and dull textbooks, readers and workbooks, and now on latest devices like computers. For much less than what we do spend, we could make our classrooms into far better learning environments than most of them are today.

6(a) निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिएः 10
(i) अक्त पर पत्थर पड़ना
(ii) अस्तीन का सांप
(iii) उन्नीन-बीस सक अंतर होना
(iv) हवाई किले बनाना
(v) दाल में काल होना

(b) निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध रूप लिखिए; 10
(i) हम कॉलेज जाउंगा।
(ii) प्रातःकाल सूरज आता है।
(iii) वह अपने माता-पिता का इक्लौता संतान है।
(iv) उसने कल मुझे गाली दिया।
(v) नौकर आटा पिसा लाया।

(c) निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए; 10
(i) बेटी
(ii) गंगा
(iii) सोना
(iv) हवा
(v) तलवार

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