(GIST OF YOJANA) सामाजिक न्याय के लिए विशेष पहल [May-2018]


(GIST OF YOJANA) सामाजिक न्याय के लिए विशेष पहल [May-2018]


सामाजिक न्याय के लिए विशेष पहल

2014 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ़ तौर पर कहा था कि यह गरीबों और वंचित की सरकार है और जो उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी प्रयास करेगी। अगर हम देखें तो केंद्र सरकार की तमाम योजनाएं और कार्यक्रम इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाए गए और बनाए जा रहे हैं। पिछले चार साल में जो योजनाएं बनीं और कार्यान्वित हुई उनका लाभ अब तक नीचे तक पहुंचने लगा है और साफ तौर पर दिखने भी लगा है।
सामाजिक सशक्तीकरण की नई सोच

हमारे देश में सामाजिक आर्थिक विकास और सशक्तीकरण के लिए समूह आधारित उपागम (ग्रुप बेस्ड अप्रौच) को स्वीकार किया गया। हमने संविधान निर्माण के दौरान ही समूह को लक्षित करके प्रावधान बनाए समाज के पिछड़ेवंचित, दलित और हाशिए के समाज के सामाजिक-आर्थिक उन्नयन और सशक्तीकरण के लिए हमने उन्हें विभिन्न समूहों के रूप में चिन्हित किया और सकारात्मक कार्रवाई के रूप में आरक्षण को अपनाया। हमने माना कि जब शिक्षा और रोजगार में आरक्षण क माध्यम_से सामाजिक-आर्थिक रूप से हाशिए पर पहुंच गए लोगों को बराबरी पर लाया जाएगा तो बाकी समस्याएंभी खत्म होती जाएंगी। हालांकि ऐसा पूरी तरीके से नहीं हुआ और दूसरे कानून भी बनाने पड़े जिसमें दलित उत्पीड़न पर रोक लगाने वाला कानून प्रमुख है।

1950 में सिर्फ अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए लागू किए गए आरक्षण का दायरा बढाना पड़ा। हमने सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए भी जाति को आधार मानकर 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था कर दी। अब जब लाखों-करोड़ों की संख्या में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े तबके के युवा अच्छी शिक्षा ग्रहण करके नौकरी के लिए प्रयास कर रहे हैं तो नई समस्याएं सामने आ रही हैं। सरकारी नौकरियों की संख्या तो करीब तीन करोड़ पर सीमित है। जबकि सामान्य स्नातक से लेकर आईआईटी,आईआईएम और पीएचडी तक पढ़ाई करने वाले दलित और पिछड़े समाज के युवाओं की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। इसलिएवंचित और हाशिए के समाज के लिए नए तरीके की समझ विकसित कर काम करने की जरूरत थी। अब ऐसा होता दिख रहा है।

उद्यमिता को बढ़ावा

स्टैंड अप योजना में दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के युवाओं को अपने व्यवसाय के लिए आर्थिक मदद की योजना 5 अप्रैल 2016 को शुरू की गईइस योजना के तहत देश की एक लाख पच्चीस हजार बैंक शाखाओं के माध्यम से दो उद्यमियों को व्यापार में आर्थिक मदद की बात की गई थी। इस योजना के तहत भी वंचित समाज के बहुत से लोगों को अपना उद्योग शुरू करने में मदद मिली है। हाल ही में इस योजना में कुछ तब्दीलियां की गई हैं, जिसके तहत अब बीस लाख रुपए तक भी सहायता मिल रही है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से दलित वेंचर कैपिटलिस्ट फंड की स्थापना की गई जिसके तहत दलित समाज के उद्यमियों को व्यापार में पूंजी की में मदद का प्रावधान किया गया।

संवैधानिक प्रावधान

अप्रैल 2016 में दलित उत्पीड़न को रोकने वाले कानून को और भी सख्त बनाते हर सरकार ने कोशिश की ताकि दलित समाज और भी सुरक्षित महसूस कर सके। सरकार ने संसद में 123 वां सविधान संसोधन प्रस्तुत किया है जिसके तहत वर्ग के लिए एक नए आयोग के गठन की बात कहि गयी है। इस आयोग के बनने के बाद पिछड़े वर्ग को और भी कई तरीके की समाजिक सुरक्षा मिलेगी

सनी कदम

केंद्र सरकार ने दलित हितो के लिए लड़ने वाले महान नेता डॉ आंबेडकर के जीवन से जुड़े पांच स्थानों को पंच तीर्थ कहकर सम्बोधित किया और उनके विकास के लिए तेज़ी से काम आगे बढ़ाया। दिल्ली में आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर की स्थपना की गई है जहां रिसर्च और अन्य अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जायेगा। ड़ॉ आंबेडकर के दिल्ली स्थित अलीपुर वाले आवास को सौ करोड़ की लागत से एक अत्यधुनिक म्यूजियम के रूप में विकसित किया गे है. लन्दन में जहां ड़ॉ आंबेडकर रहे थे उस घर को भी खरीदा गया है। भारत सरकार ने 14 अप्रैल को राष्ट्रिय समरसता दिवस घोषित किया है। भारत सरकार के समाजिक न्याय और अधारिकता मंत्रालय की तरफ से सौ विद्यार्थियों को अमेरिका के कोलंबिया विश्विधालय और इंग्लैंड के लन्दन स्कुल ऑफ़ इकोनॉमिक्स की सैर कराई जाती है। जिससे वे आंबेडकर के विचारो से और प्रेरणा पा सके।

महिलाओं के लिए

वैसे कुछ हद तक महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में आगे आई हैं और उनकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है लेकिन अभी भी बड़ा हिस्सा ऐसा है जिसके लिए काम किया जाना बाकी है। पहले गांवों में रहने वाली, अनपढ़ महिला वह चाहे किसी भी समाज से आती हो किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं ले पाती थी। मोदी सरकार से पहले ऐसी महिलाओं के। लिए कोई कारगर योजना शायद ही बनी हो। मोदी सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ा। योजना के तहत लड़कियों के लिए विभिन्न योजना शुरू की। वित्तमंत्री ने अपने बजट। भाषण में बताया कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के तहत शुरू की गई सुकन्या समृद्धि। स्कीम सफल रही है। इस स्कीम की शुरुआत 2015 में की गई थी। इस स्कीम के तहत दो साल के भीतर ही देश में लड़कियों के नाम पर 1.26 करोड़ खाते खोले गएजिसमें 19,183 करोड़ रुपये जमा हुए।

दिव्यांग कल्याण

सरकार ने इन चार वर्षो में दलित, आदिवासियों और पिछड़ी जातियों के साथ-साथ ऐसे अन्य वर्गों को भी चिन्हित करने और उनके लिए कारगर योजना बनाने का काम किया है जो विकास की दौड़ में विभिन्न कारणों से साथ नहीं आ सके। शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को प्रधानमंत्री ने एक नए शब्द दिव्यांग कहकर संबोधित किया और उनके लिए बड़े-बड़े कैंप आयोजित किए गए और वहां उन्हें मुफ्त में कृत्रिम अंग, हियरिंग एड, ट्राइसाइकिल आदि दिए गए। जहां 1992 से 2012 के बीच ऐसे 100 कैंप आयोजित किए गए थे। वहीं 2014 से 2016 के बीच ही 100 से ज्यादा कैंप आयोजित किए गए। जिन दो कैपों में प्रधानमंत्री का खुद रहना हुआ वो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हुए और उनमें दस हजार से ज्यादा दिव्यांगों को मदद की गई।
सुगम्य भारत कार्यक्रम के तहत हर । सरकारी इमारत को दिव्यांगों को सुगम्य बनाने के लिए उसमें रैंप और अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। डॉ आंबेडकर के संपूर्ण वाडमय का ब्रेल लिपि में अनुवाद किया गया है जो केंद्र सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

वरिष्ठ नागरिक

वरिष्ठ नागरिकों की संख्या में भी बढोतरी हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई नई योजनाएं शुरू की हैं और कई योजनाओं के पैसे सत्तर से अस्सी फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। इस योजना के तहत 2014-15 और 2015-16 में 42 करोड़ रुपए इकतालीस हजार वरिष्ठ नागरिकों पर खर्च किए गए और 2017 में 29 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। वरिष्ठ नागरिकों पर बनी राष्ट्रीय नीति को बदलती जनसंख्या के हिसाब से बदला गया। है जिसमें उनकी सामाजिक-आर्थिक जरूरतों और बदलते सामाजिक मूल्यों का पूरा ध्यान रखा गया है।

छात्रवृति

प्रीमैट्रिक में पढ़ने वालों दलित, पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को कारगर तरीके से स्कॉलरशिप बांटी गई है। 2014-15 और 2015-16 में 49 लाख 24 हजार सात सौ दलित छात्रों को 1038.73 करोड़ रुपए और 2016-17 में रुपए 344.28 करोड़ करीब साढ़े 13 लाख से अधिक दलित छात्रों को स्कॉलरशिप के रूप में दिए गए। करीब पचास लाख ओबीसी छात्रों को 230 करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप 2014-15 और 2015-16 में दी गई। 2016-17 के दौरान 106 करोड़ रुपए से ज्यादा की स्कॉलरशिप ओबीसी छात्रों को दी गई। इसी तरह मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक के विद्यार्थियों को जो दलित और पिछड़े वर्ग से आते हैं उन्हें सहयोग किया गय।

जिले को केंद्र मानकर काम

हमने अबतक पिछड़ेपन का आधार सिर्फ जाति को मानकर काम किया था लेकिन केद्र सरकार ने सशक्तीकरण के लिए नए मापदंड तैयार किए हैं। प्रधानमंत्री ने अपनी नई कोशिश के तहत जिले को भी एक केद्र माना है। अगर जिला ही पिछड़ा होगा, कनेक्टेड नहीं होगा तो वहां रहने वाला हर नागरिक दूसरों की तुलना में पिछड़ जाएगा। इसलिए प्रधानमंत्री के निर्देश पर देश के 115 जिलों का चुना गया है और उनके विकास की अलग से योजना तैयार की गई है। इन पिछड़े जिलों में अब नई सोच के साथ काम हो रहा है।

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Courtesy: Yojana