(Download) UPSC IAS Mains Indian Language (Hindi Compulsory) Exam Paper - 2016

(Download) UPSC IAS Mains Indian Language (Hindi Compulsory) Exam Paper - 2016

Exam Name: UPSC IAS Mains Indian Language (Hindi) Exam Paper

Year: 2016

Exam Date: 7-12-2016

1. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर 600 शब्दों में निबन्ध लिखिए : 100 marks

(a) संस्कृति क्यों महत्त्वपूर्ण है
(b) स्मार्ट नगर एवं अनस्मार्ट नागरिक
(c) न्यायिक सक्रियता (Activism) बनाम न्यायिक असीमितता (Overreach)
(d) हमारी विरासत और स्कूली बच्चे !

2. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उसके आधार पर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट, सही और संक्षिप्त भाषा में दीजिए : 12x5=60 marks

यह कहा जाता है कि स्त्रियाँ आधे आकाश पर छाई हुई हैं । हम इसमें संशोधन कर कह सकते हैं कि वे इससे अधिक स्थान की अधिकारी हैं। लेकिन तो भी प्रत्येक देश के इतिहास के सभी कालों, संस्कृति और परम्परा, क्षेत्र, धर्म जाति, वर्ग, श्रेणी, नस्ल, वर्ण, वैविध्यपूर्ण अतीत एवं वर्तमान में स्त्रियों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों से कमतर आँका जाता रहा है। उनके साथ एक तरतीब से भोजन, कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं विकास में प्रतिभागी होने के अवसरों, नेतृत्व और अपने स्वप्नों को साकार करने में भेदभाव बरता जाता रहा है । वे सच्चे अर्थों में विश्व की सबसे बड़ी ‘अल्पसंख्यक कही जा सकती हैं।

पितृसत्ता-व्यवस्था स्त्रियों को ऐसे व्यक्तियों के रूप में नहीं देखती जिनकी अपनी एक पहचान हो । वे इस रूप में भी नहीं देखी जातीं कि वे अपने आप में सम्पूर्ण हैं कि उनका अपना सम्मान और स्वायत्तता है कि वे सम्मान की अधिकारिणी हैं कि सामाजिक व्यवस्था में, कानून में एवं संस्थाओं में उनके समान अधिकार हैं । इसके बजाय वे पुरुषों के मात्र औज़ार के रूप में देखी जाती हैं । उन्हें पीढ़ी को आगे ले जाने वाले प्रतीक के रूप में, सेवाभाव रखने वाली, यौन-तृप्ति की पूर्ति का साधन और परिवार की सामान्य सम्पन्नता के वाहक के रूप में माना जाता रहा है। उनकी सांस्कृतिक स्वीकृति केवल इस रूप में है कि वे किसी पुरुष की पुत्री, पत्नी या माँ हैं । इसके अतिरिक्त उनकी कोई और पहचान नहीं है और उपर्युक्त पहचान के न रहने पर वे हेय दृष्टि से देखी जाती हैं ।

एकल स्त्रियाँ इस वृत्त के बाहर खड़ी दृष्टिगोचर होती हैं । इनमें वे शामिल हैं जो सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य विवाह योग्य अवस्था की हैं लेकिन अभी तक विवाहित नहीं हैं अथवा वे जो विधवा हैं, तलाक़शुदा हैं या अलग हो चुकी हैं । पुरुष के सुरक्षावृत्त की अनुपस्थिति समाज द्वारा अच्छी नहीं मानी जाती । यह तब और भी बढ़ जाती है जब एक स्त्री इस सुरक्षा-वृत्त को अस्वीकार कर देती है।या अपने साथी को दुर्घटना या बीमारी के कारण खो देती है । पुरुष को सर्वाधिक द्वेष उस स्त्री से है। जो न केवल अकेले रहती है बल्कि पुरुष की छाया के बाहर अपनी अस्मिता के साथ जीवन व्यतीत करती है ।

महिलाएँ सर्वाधिक विकसित देशों में भी 60 से 80 प्रतिशत तक भोजन का उत्पादन करती हैं। और विश्व के आधे भोजन-उत्पादनकर्ता होने का श्रेय भी उन्हें ही है । सांस्कृतिक रूप से भी यदि देखा जाए तो अधिकांश घरों में स्त्रियाँ ही भोजन-प्रदाता हैं । तथापि भारतवर्ष में सामाजिक-सांस्कृतिक रीतियाँ यह सुनिश्चित करती हैं कि घरों में स्त्रियाँ न केवल बाद में खाएँगी और कम खाएँगी बल्कि कभी-कभी तो ऐसा भी हो सकता है कि उनके खाने के लिए कुछ न बचे । ऐसे घरों में जहाँ पर्याप्त मात्रा में भोजन है, वहाँ भी स्त्रियों को पोषणयुक्त भोजन नहीं मिल पाता । एकल स्त्रियाँ भी सामाजिक बन्धनों और अतिरिक्त भेदभाव के चलते इस श्रेणी में आ जाती हैं जबकि वे अकेले अपने दम पर दुनिया में संघर्ष करती हैं।

भारत उन देशों में से एक है जहाँ पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या कम है । देश की जनसंख्या में उनका प्रतिशत पिछली शताब्दी से लगातार गिर रहा है । 2001 की जनगणना से यह ज्ञात हुआ कि प्रत्येक 1000 पुरुषों के समानान्तर 933 स्त्रियाँ हैं । यदि पुरुषों की तरह स्त्रियों को समान जीवन-अवसर मिलें और साथ ही उनके स्वास्थ्य और पोषण का ध्यान रखा जाए तो यह संभावना बलवती हो जाएगी कि पुरुषों और स्त्रियों की संख्या बराबर हो जाए । फिलहाल 2001 में पुरुषों की तुलना में स्त्रियाँ 3 करोड़ 50 लाख कम थीं । ये अनुपात 2011 की जनगणना में थोड़ा सुधरा अर्थात् 933 की तुलना में 940 हो गया। एक बड़ी चिंता का विषय यह है कि 2001 में 6 साल तक के बच्चों में लड़कों की तुलना में लड़कियों की जन्म-दर 927 ही रह गयी और 2011 में और गिर कर 914 रह गयी । ये आँकड़े बताते हैं कि सामाजिक और सांस्कृतिक विसंगतियों एवं बढ़ती तकनीक के चलते लगातार स्त्रियों के जीवन-अवसर कम होते जा रहे हैं। कहा जा सकता है। कि भारतीय समाज में नियमित रूप से लाखों लड़कियाँ एवं स्त्रियाँ मारी जा रही हैं।

(a) जनगणना के आँकड़े लड़कियों एवं स्त्रियों के बारे में क्या सन्देश देते हैं ?  12 marks
(b) भोजन एवं स्त्रियों के संदर्भ में मिलने वाली असमानता की विडम्बना क्या है ? 12 marks
(c) इस कथन से लेखक का क्या अभिप्राय है कि स्त्रियाँ आधे से अधिक आकाश में छाई हैं 12 marks
(d) पितृसत्तात्मक समाज में स्त्रियाँ कैसे “मात्र औज़ार” बनकर रह गयी हैं  12 marks
(e) लेख़क के अनुसार एकल स्त्री को कैसे हमारे समाज में आसानी से क्षति पहुँचाई जा सकती है ?  12 marks

 

Q3. निम्नलिखित अनुच्छेद का सारांश लगभग एक-तिहाई शब्दों में लिखिए । इसका शीर्षक लिखने की आवश्यकता नहीं है । सारांश अपने शब्दों में ही लिखिए । 60 marks

हममें से अधिकांश लोग इस बात से सहमत होंगे कि वफ़ादार होना प्रशंसनीय है । हम अपने परिवार के प्रति, मित्रों के प्रति तथा अपने देश के प्रति वफ़ादारी की अनुशंसा करते हैं । वास्तव में उन सभी व्यक्तियों तथा समूहों के प्रति हमें वफ़ादार होना भी चाहिए जिनके प्रति हम आभारी होते हैं । जब हम वफ़ादारी की बात करते हैं तो हमारा अभिप्राय यह होता है कि जब वे कठिनाइयों में अथवा किसी विपदा में हों तो हम उनकी सहायता के लिए प्रस्तुत रहें । साथ ही हर समय उनकी भलाई हमारी अभिरुचि हो ।

आमतौर पर यह भी स्पष्ट रूप से पाया जाता है कि कोई व्यक्ति बेवफ़ा तब होता है जब वह अपने माता-पिता के प्रति उदासीन रहता है या वह अपने देश की सेना के विरुद्ध विद्रोह करता है और अपने देश के लोगों को अंधाधुंध मौत के घाट उतारता है । इस प्रकार के लोगों को हममें से अधिकांशत: अनुमोदित नहीं करते । | लेकिन, अनेक बार ऐसी स्थिति भी पैदा होती है कि जब यह निर्णय करना कठिन हो जाता है। कि कौन वफ़ादार है और कौन नहीं । एक चतुर बच्चा शिक्षा छोड़ कर धन कमाने के अपने माता-पिता के आग्रह का विरोध कर सकता है । उसका यह विश्वास हो सकता है कि वह अपनी शिक्षा को कुछ और वर्ष ज़ारी रखते हुए भविष्य में अपने माता-पिता को और बेहतर ढंग से कुछ लौटा सकता है । यदि वह अपनी शिक्षा को अभी स्थगित कर देता है तो उसकी प्रतिभा विनष्ट हो जाएगी और उसका लाभ किसी को भी नहीं मिल पाएगा ।

कुछ कल्पनाहीन लोग ही इस प्रकार का निर्णय लेने वाले लड़के या लड़की की निंदा करेंगे। किंतु आमतौर पर इस प्रकार का बच्चा यदि कर्त्तव्यनिष्ठ एवं संवेदनशील हो तो उसकी मदद की जानी चाहिए और उसे प्रोत्साहित भी किया जाना चाहिए, बजाए इसके कि उसकी आलोचना की जाए । दूसरी तरफ कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में यदि कोई बच्चा अपने ग़रीब माता-पिता के मदद सम्बन्धी आग्रह को ठुकरा देता है तो उसे बेवफ़ा समझा जाता है । यदि वह भविष्य में सफलता हासिल करता है तो वह अपनी युवावस्था की बेवफ़ाई पर प्रायश्चित करता है।

कभी-कभी यह समस्या तब और बड़ी हो जाती है जब किसी व्यक्ति को अपने देश की सरकार से जोड़ कर इस सम्बन्ध में देखा जाता है। अपने देश में गंभीरता और दायित्व-निर्वाह के साथ रहने वाले व्यक्तियों का वह समूह, जो अपने देश को खुशहाल तथा समृद्ध देखना चाहता है, कभी-कभी सरकार के विरुद्ध यह सोचकर विद्रोह कर देता है कि वह सरकार निकम्मी है, उसके पास

उस सरकार के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करने के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं बचा । ऐसे लोगों को सरकार तत्काल विद्रोही और प्रवंचक घोषित कर देती है। हो सकता है कि वे विद्रोही हों, किन्तु उन्हें प्रवंचक कहना उचित नहीं लगता । हो सकता है कि वह समूह अपने देशवासियों के प्रति अधिक वफ़ादार हो, बजाए इसके कि वह सरकार के प्रति वफ़ादार हो ।

दुर्भाग्य से तब तक यह कहना बहुत कठिन है कि उस समूह का विद्रोह देश के प्रति वफ़ादारी के कारण प्रेरित है अथवा उसके निजी स्वार्थों के कारण, जब तक कि वह विद्रोह सफल न हो जाए । तब यह प्रश्न उठता है कि अब जब विद्रोही सफल हो गए हैं और उन्होंने नई सरकार बना ली है तो क्या वे यह स्वीकार करेंगे कि देश की समस्त जनसंख्या और उनके राजनीतिक शत्रुओं के भी कुछ अधिकार तो अवश्य हैं; जैसे अपने विचारों को पूरी आज़ादी के साथ प्रस्तुत करने का अधिकार और जन-समर्थन जुटाने के प्रयत्न का अधिकार । या वे समूह अपनी शक्तियों का उपयोग राजनीतिक शत्रुओं को समाप्त करने में कर रहे हैं । यदि वे पहला आचरण कर रहे हैं तो समझो कि वे अपने देश के प्रति पूरी तरह वफ़ादार हैं, न कि वे अपने समूह के लाभ के प्रति वफ़ादार हैं और यदि वे दूसरे प्रकार का आचरण कर रहे हैं तो हमें यह समझना चाहिए कि वे जिस सरकार को गिरा कर आए हैं, उससे अधिक वफ़ादारी देश के प्रति वे भी नहीं कर रहे हैं । इसका बोध हमें अत्यधिक देरी से जाकर ही होता है । (686 शब्द)

 

Q4. निम्नलिखित गद्यांश का अंग्रेज़ी में अनुवाद कीजिए : 20 marks

एक अमीर अपने जहाज़ पर समुद्री यात्रा कर रहा था, उसी समय एक तूफ़ान आया । जहाज़ पर एक गुलाम जो पहली बार समुद्री यात्रा कर रहा था, आतंकित हो कर रोने-चिल्लाने लगा । यह कुछ देर तक चलता रहा और कोई भी उसे चुप नहीं करा सका । क्रोधित हो कर अमीर ने पूछा क्या यहाँ कोई भी ऐसा नहीं है जो इस नीच कायर को चुप करा सके ?”

एक दार्शनिक भी उस जहाज़ पर यात्रा कर रहा था। उसने अमीर से कहा – “मैं इस आदमी को चुप करा सकता हैं । महोदय, आप मुझे बस इस बात की अनुमति दें कि मैं जो चाहें, इसके साथ करूँ ।” अमीर ने कहा – “आपको अनुमति दी जाती है, आप जो चाहें, करें ।”

दार्शनिक ने कुछ नाविकों को बुलाया एवं उन्हें आदेश दिया कि इस गुलाम को समुद्र में फेंक दिया जाए । नाविकों ने ऐसा ही किया । निरुपाय हो कर उस ग़रीब आदमी ने भयवश चिल्लाते हुए अपने हाथ-पाँव बड़ी तीव्रता से चलाने शुरू कर दिए । लेकिन कुछ ही समय में दार्शनिक ने नाविकों को यह आदेश दिया कि वह उस गुलाम को जहाज़ पर वापस ले आएँ । जहाज़ पर आते ही पस्त और भयभीत गुलाम बिल्कुल चुप हो गया । अमीर इस आकस्मिक परिवर्तन पर चकित हो गया । उसने दार्शनिक से इसका कारण पूछा । दार्शनिक बोला – “हम कभी यह नहीं समझते कि हम किसी भी स्थिति में कितने ठीक-ठाक हैं जब तक कि हम किसी बदतर स्थिति में नहीं पहुँच जातें ।”

5.निम्नलिखित गद्यांश का हिंदी में अनुवाद कीजिए : 20 marks

Man has always been fascinated by dreams. He has always tried to find explanations for his dreams. Perhaps dreams tell us about the future or the past, perhaps they tell us about our deepest fears and hopes. I don't know. Today, I want to give you a completely different explanation. But before I do so, I must give you one or two facts about dreams. First of all, everybody dreams. You often hear people say, 'I never dream,' when they mean, 'I can never remember my dreams. When we dream, our eyes move rapidly in our sleep as if we were watching a moving picture, following it with our eyes. This movement is called 'REM', that is Rapid Eye Movement. REM sleep is the sleep that matters. Experiments have proved that if we wake people up throughout the night during REM, they will feel exhausted the next day. But they won't feel tired at all if we wake them up at times when they are not dreaming. So the lesson is clear : it is dreaming that really refreshes us, not just sleep. We always dream more if we have had to do without sleep for any length of time.

If that is the case, how can we explain it ? I think the best parallel I can draw is with computers. After all, a computer is a very primitive sort of brain. To make a computer work, we give it a program. When it is working, we can say it is 'awake'. If ever we want to change the program, that is to change the information we put into the computer, what do we do? Well, we have to stop the computer and put in a new program or change the old program.

 

6.(a) निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिये : 2x5=10 marks

(i) अंगारो पर लौटना 2 marks

(ii) ईट का जवाब पत्थर से देना 2 marks

(iii) खटाई  में पड़ना 2 marks

(iv) घोड़े बेच कर सोना 2 marks

(v) जूते चाटना 2 marks

(b) निम्नलिखित वाक्यों के शुद्ध रूप लिखिए : 2x5=10 marks

(i) गलीमत है कि मैं गिरते गिरते बच गया  2 marks
(ii) हम जाता हूँ। 2 marks
(iii) लड़की खाता है 2 marks
(iv) हमने स्कूल जाना है 2 marks
(v) उसने मुझे दिल्ली बुलाई  2 marks

(c) निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची लिखिए :  2x5=10 marks

(i) पंकज  2 marks
(ii) ईर्ष्या 2 marks
(iii) आदित्य 2  marks
(iv) अर्जुन 2 marks
(v) आकाश 2 marks

(d) निम्नलिखित युग्मों को इस तरह से वाक्य में प्रयुक्त कीजिए कि उनका अर्थ स्पष्ट हो जाए और उनके बीच का अंतर भी शब्दार्थ में लिखित रूप में वर्णित हो : 2x5=10 marks

(i) प्रमाण - प्रणाम  2 marks
(ii) अक्षर - अक्षत  2 marks
(iii) आभास - आवास 2  marks
(iv) प्रतिज्ञा - प्रतीक्षा 2 marks
(v) अधम - अधर्म 2 marks

 







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